सावन की कामिका एकादशी पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग, अभी नोट करें डेट और शुभ मुहूर्त
सावन माह की कामिका एकादशी का व्रत 8 अगस्त 2026 को रखा जाएगा, जिस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग बन रहा है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत कर ...और पढ़ें

कामिका एकादशी व्रत से मिलेगा शुभ फल (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कामिका एकादशी को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली कामिका एकादशी के दिन व्रत करने से साधक को शुभ फल मिलता है और सभी पापों से छुटकारा मिलता है। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि सावन में कब किया जाएगा कामिका एकादशी का व्रत और शुभ मुहूर्त के बारे में।
कामिका एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Kamika Ekadashi 2026 and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर कामिका एकादशी मनाई जाती है। इस तिथि की शुरुआत 08 अगस्त को रात 03 बजकर 29 मिनट पर होगा। वहीं, इस तिथि का समापन 09 अगस्त को रात 12 बजकर 34 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 08 अगस्त को कामिका एकादशी व्रत किया जाएगा। कामिका एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग सुबह 06 बजकर 04 मिनट से 06 बजकर 21 मिनट तक है।
कामिका एकादशी व्रत 2026 पारण टाइम (Kamika Ekadashi Vrat 2026 Paran Time)
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। कामिका एकादशी व्रत का पारण करने का समय 09 अगस्त को सुबह 06 बजकर 05 मिनट से 08 बजकर 39 मिनट तक है। इस दिन मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान जरूर करना चाहिए। इससे साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 36 मिनट से 05 बजकर 20 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से 03 बजकर 31 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 58 मिनट से 07 बजकर 206 मिनट तक
अमृत काल- रात 08 बजकर 12 मिनट 09 बजकर 39 मिनट तक
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इन बातों का रखें ध्यान
- एकादशी के दिन सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए। तामसिक भोजन से दूर रहें।
- दशमी तिथि की रात से ही पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें और सच्चे मन से पूजा करें।
- पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें।
- व्रत के दिन क्रोध करना, झूठ बोलना, किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए।
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