सभी पापों से मुक्ति और मोक्ष दिलाता है कामिका एकादशी व्रत, 9 अगस्त को ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा
हिंदू धर्म में कामिका एकादशी का विशेष महत्व है, जो 9 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। यह व्रत मोक्ष, पापों ...और पढ़ें
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कामिका एकादशी 2026 (Picture Credits- AI Image)
HighLights
कामिका एकादशी 9 अगस्त 2026, रविवार को मनाई जाएगी।
यह व्रत मृत्यु के पश्चात मोक्ष और पापों से मुक्ति दिलाता है।
सावन में विष्णु पूजा से पितरों को शांति और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक महीने में दो एकादशी तिथि पड़ती है। अगस्त महीने में भी दो एकादशी तिथि पड़ने वाली है। एक कामिका एकादशी 9 अगस्त 2026, रविवार और दूसरी श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी 24 अगस्त 2026 सोमवार के दिन है।
कामिका एकादशी व्रत को लेकर शास्त्रों में विधान है कि, इस व्रत को करने वाला व्यक्ति मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सभी तरह के पापों से छुटकारा मिलता है। माना जाता है कि, कामिका एकादशी का व्रत रखने से वाजपेय यज्ञ यानी (आशीर्वाद, सफलता और शक्ति के लिए 17 दिनों तक किए जाने वाला यज्ञ) करने के समान होता है।
पुराणों में कामिका एकादशी का महत्व
ब्रह्म वैवर्त पुराण के मुताबिक, एक ब्राह्मण की जान लेने के पाप से दबे एक व्यक्ति ने इस गलती से प्रायश्चित करने का रास्ता खोजा। ऋषि ने उन्हें भगवान विष्णु की पूजा करन और कामिका एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। इससे शारीरिक कष्ट कम करने, मानसिक रुकावटों को दूर करने और पिछले जन्म के कर्मों के भार को कम करने में मदद मिल सकती है।
कामिका एकादशी के दिन का सम्मान करना चाहिए। इसके लिए सुबह जल्दी उठें और दिन की शुरुआत सात्विक सोच के साथ करें। भगवान के भजन और ध्यान में समय बिताना चाहिए। भगवान विष्णु, नारायण या विट्ठल देव की पूजा करें। एकादशी की कथा पढ़ने के साथ दान और सेवा से जुड़े कार्यों में अपनी भूमिका अदा करें। अपनी क्षमता के अनुसार जितना हो सके उतना ध्यानपूर्वक मौन व्रत का पालन करें और भगवान चिंतन में समय बिताएं।

सावन में भगवान विष्णु की पूजा के लाभ
कामिका एकादशी का व्रत रखने से अमोघ फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन तीर्थ स्थलों में खास स्नान-दान करने से एकादशी का व्रत सफल माना जाता है। कामिका एकादशी के मौके पर हरि पूजन करने से पितरों से जुड़े कष्ट भी दूर होते हैं। शास्त्रों के अनुसार सावन माह में भगवान विष्णु की पूजा करने से गंधर्वों और नागों की भी पूजा अपने आप हो जाती है।
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