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    Utpanna Ekadashi 2026: कब और क्यों मनाई जाती है उत्पन्ना एकादशी? यहां पढ़ें धार्मिक महत्व

    Updated: Sun, 08 Mar 2026 08:00 PM (IST)

    सनातन धर्म में अगहन मास भगवान कृष्ण को समर्पित है, जिसमें उत्पन्ना एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन आयुष्मान, सौभाग्य और शिववास जैसे शुभ योग बन रहे है ...और पढ़ें

    Utpanna Ekadashi 2026: उत्पन्ना एकादशी का धार्मिक महत्व

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में अगहन महीने का खास महत्व है। यह महीना जगत के पालनहार भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस महीने में रोजाना भगवान कृष्ण की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही एकादशी तिथि पर उनके निमित्त व्रत रखा जाता है।

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    अगहन महीने में उत्पन्ना एकादशी भी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है। उत्पन्ना एकादशी के दिन व्रत रखने से साधक पर लक्ष्मी नारायण जी की कृपा बरसती है। आइए, उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi 2026) की सही तिथि और शुभ मुहूर्त जानते हैं-

    उत्पन्ना एकादशी शुभ मुहूर्त (Utpanna Ekadashi 2026 Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, 03 दिसंबर को देर रात 11 बजकर 03 मिनट पर अगहन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शुरू होगी। वहीं, 04 दिसंबर को देर रात 11 बजकर 44 मिनट पर मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि से गणना होती है। इसके लिए 04 दिसंबर को उत्पन्ना एकादशी मनाई जाएगी। इस तिथि पर साधक व्रत रख विधि विधान से भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं।

    उत्पन्ना एकादशी पारण (Utpanna Ekadashi Paran Timing)

    सामान्य जन 05 दिसंबर को सुबह 06 बजकर 59 मिनट से लेकर सुबह 09 बजकर 04 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं। इस दौरान साधक स्नान-ध्यान कर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करें। वहीं, पूजा के बाद अन्न का दान कर व्रत खोलें।

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    उत्पन्ना एकादशी शुभ योग (Utpanna Ekadashi Shubh Yoga)

    ज्योतिषियों की मानें तो अगहन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर आयुष्मान और सौभाग्य योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही शिववास योग का संयोग है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव कैलाश पर देवी मां पार्वती के साथ विराजमान रहेंगे। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी।

    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 59 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 05 बजकर 24 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 10 मिनट से 06 बजकर 04 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 01 बजकर 55 मिनट से 02 बजकर 37 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 05 बजकर 21 मिनट से 05 बजकर 49 मिनट तक
    • निशिता मुहूर्त - रात 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।