Papankusha Ekadashi 2026: कब और क्यों मनाई जाती है पापांकुशा एकादशी? यहां पढ़ें धार्मिक महत्व
पापांकुशा एकादशी सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को दशहरे के बाद मनाई जाती है। ...और पढ़ें

Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी का धार्मिक महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में एकादशी पर्व का खास महत्व है। यह पर्व कृष्ण और शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा और भक्ति की जाती है। वैष्णव समाज के अनुयायी एकादशी के दिन व्रत रखते हैं।
इस व्रत को करने से साधक को अक्षय फल मिलता है। साथ ही लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि पापांकुशा एकादशी कब और क्यों मनाई जाती है और क्या धार्मिक महत्व है? आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

कब मनाई जाती है पापांकुशा एकादशी? (Papankusha Ekadashi Religious Significance)
हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन पापांकुशा एकादशी मनाई जाती है। आसान शब्दों में कहें तो शारदीय नवरात्र के दो दिन बाद यानी दशहरा के अगले दिन पापांकुशा एकादशी मनाई जाती है। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में इंदिरा एकादशी मनाई जाती है। पापांकुशा एकादशी के दिन व्रत रख लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक द्वारा जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
पापांकुशा एकादशी कब है?
वैदिक पंचांग की गणना अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 21 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 11 मिनट पर होगी। वहीं, 22 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 47 मिनट पर आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशीा तिथि का समापन होगा। इस प्रकार 22 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी मनाई जाएगी।
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पापांकुशा एकादशी पारण समय
गुरुवार 22 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। वहीं, 23 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी का पारण किया जाएगा। पापांकुशा एकादशी का पारण सुबह 06 बजकर 27 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 42 मिनट के मध्य किया जाएगा।
पापांकुशा एकादशी शुभ योग (Papankusha Ekadashi Shubh Yog)
ज्योतिष गणना की मानें तो आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर वृद्धि और ध्रुव योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक के सकल मनोरथ सिद्ध होंगे। साथ ही जीवन में व्याप्त परेशानियों से मुक्ति मिलेगी।
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