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    Varuthini Ekadashi 2026 Date: किस दिन रखा जाएगा वरूथिनी एकादशी का व्रत? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग

    Updated: Wed, 11 Feb 2026 09:00 PM (IST)

    वरूथिनी एकादशी वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन भक्त लक्ष्मी नारायण की पूजा करते हैं और मनोक ...और पढ़ें

    Varuthini Ekadashi 2026 Date: वरूथिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

    Varuthini Ekadashi 2026 Date: वरूथिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

    HighLights

    1. एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होता है।

    2. इस दिन लक्ष्मी नारायण जी की विशेष पूजा की जाती है।  

    3. भगवान विष्णु की पूजा करने से दुखों का नाश होता है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन वरूथिनी एकादशी मनाई जाती है। यह पर्व जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर भक्तजन प्रातः काल में स्नान-ध्यान कर भक्ति भाव से लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करते हैं। वहीं, मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखा जाता है।

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    धार्मिक मत है कि वरूथिनी एकादशी व्रत करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। वहीं, मृत्यु के बाद साधक को उच्च लोक में स्थान मिलता है। आइए, वरूथिनी एकादशी की सही तिथि और शुभ मुहूर्त ( Varuthini Ekadashi 2026 Date) जानते हैं-

    वरूथिनी एकादशी शुभ मुहूर्त (Varuthini Ekadashi Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 13 अप्रैल को देर रात 01 बजकर 16 मिनट पर होगी। वहीं, एकादशी तिथि का समापन 14 अप्रैल को देर रात 01 बजकर 08 मिनट पर होगा। इस प्रकार 13 अप्रैल को वरूथिनी एकादशी मनाई जाएगी।

    वरूथिनी एकादशी पारण समय

    वरूथिनी एकादशी का पारण 14 अप्रैल को किया जाएगा। पारण का समय 14 अप्रैल को सुबह 06 बजकर 54 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 31 मिनट तक है। इस दौरान साधक स्नान-ध्यान कर विधिवत लक्ष्मी नारायण की पूजा करें। इसके बाद अन्न का दान कर व्रत खोलें।

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    वरूथिनी एकादशी शुभ योग (Varuthini Ekadashi Shubh Yoga)

    ज्योतिषियों की मानें तो वरूथिनी एकादशी पर शुभ और शुक्ल योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही शिववास योग भी है। इस दौरान देवों के देव महादेव कैलाश पर विराजमान रहेंगे। वहीं, एकादशी के दिन शतभिषा और धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग है। इन योग में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक के सुख और सौभाग्य में अपार वृद्धि होगी।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।