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Yogini Ekadashi 2026: किस दिन रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? यहां नोट करें शुभ मुहूर्त और संयोग

Published: Mon, 23 Feb 2026 04:30 PM (IST)

योगिनी एकादशी आषाढ़ मास में मनाई जाती है और यह भगवान विष्णु तथा देवी लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन ...और पढ़ें

Yogini Ekadashi 2026: योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Yogini Ekadashi 2026: सनातन धर्म में आषाढ़ महीने का खास महत्व है। यह महीना जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से भगवान विष्णु अगले चार महीने तक क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं। वहीं, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जागृत होते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहते हैं।

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आषाढ़ माह में ही योगिनी एकादशी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवी मां लक्ष्मी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही साधक को मनचाहा वरदान मिलता है। आइए, योगिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त और योग जानते हैं-

योगिनी एकादशी शुभ मुहूर्त (Yogini Ekadashi 2026 Date Shubh Muhurat)

ज्योतिषियों की मानें तो आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 11 जुलाई को सुबह 05 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि अनुसार 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसके अगले दिन यानी 11 जुलाई को पारण किया जाएगा। पारण का समय दोपहर 01 बजकर 50 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 36 मिनट तक है। इस दौरान साधक पूजा-पाठ कर पारण सकते हैं।

योगिनी एकादशी शुभ योग (Yogini Ekadashi 2026 Date Shubh Yog)

आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर धृति योग का निर्माण सुबह 07 बजकर 15 मिनट तक है। इस दिन दुर्लभ अभिजीत मुहूर्त योग दिन में 11 बजकर 59 मिनट से प्रारंभ होगा, जो दोपहर में 12 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगा।

शिववास योग

योगिनी एकादशी पर शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन भगवान शिव सुबह 08 बजकर 16 मिनट से कैलाश पर रहेंगे। इस दौरान भगवान शिव की पूजा और अभिषेक करने से साधक के सुख -सौभाग्य और वंश में बढ़ोतरी होती है। साथ ही शुभ कामों में सफलता मिलेगी। इस दिन बव और बालव करण के भी योग बन रहे हैं। इनमें सबसे पहले बव करण का निर्माण हो रहा है। इसके बाद बालव करण का संयोग है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।