कहीं ड्रैगन का खौफ तो कहीं बिना धड़ का राक्षस... जानें सूर्य ग्रहण से जुड़ीं दुनियाभर की सबसे डरावनी और अनोखी कहानियां!
दुनिया भर में सूर्य ग्रहण को लेकर अलग-अलग और अनोखी मान्यताएं व लोककथाएं प्रचलित हैं। कहीं इसे राक्षसों द्वारा निगलने तो कहीं देवताओं के क्रोध का प्रतीक माना जाता है, जिसमें चीन, भारत, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका की कहानियां शामिल हैं।

दुनिया भर में सूर्य ग्रहण से जुड़ी अनोखी प्रचलित कहानियां

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया भर में घटने वाली एक जैसी घटनाओं को लेकर अलग और अनोखी कहानियां सुनने को मिलती हैं। किसी स्थान पर इन्हें ईश्वरीय आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है, तो कहीं पर इन्हें अशुभ और अमंगल माना जाता है। इसी तरह दुनिया भर में ग्रहण काल को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। कहीं पर इसे सामान्य माना जाता है, तो कुछ जगहों पर इससे जुड़ी किंवदंती (लोककथा) काफी ज्यादा प्रचलित हैं। आइए जानते हैं दुनियाभर में सूर्य ग्रहण से जुड़ी घटनाओं को कैसे देखा जाता है?
दुनिया भर की अलग-अलग परंपराओं में सूर्य ग्रहण को राक्षसों द्वारा खाए जाने वाली घटना से जोड़कर देख जाता है। जबकि चंद्र ग्रहण को एक अंतरंग मुलाकात के रूप में देखा जाता है। दुनिया भर में ग्रहण से जुड़ी अनोखी कहानियां और रीति-रिवाज आपको भी हैरान कर देंगे।

चीन में सूर्य ग्रहण से जुड़ी कहानियां
प्राचीन चीन में लोगों के बीच यह धारणा थी कि, सूर्य ग्रहण तब लगता है, जब एक आकाशीय अजगर सूर्य को निगल जाता है। इस बात का जिक्र आज से 4000 साल पुराने चीनी अभिलेखों में भी देखने को मिलती है, जहां इस बात का जिक्र किया गया है कि, 'सूर्य को निगल लिया गया है।'
अजगर को डराने और सूर्य को बचाने के लिए प्राचीन चीनी लोग ढोल बचाते और शोर मचाते थे। क्योंकि उनका मानना था कि, शोर मचाने से सूर्य लौट आता था। हालांकि प्राचीन चीनी लोगों को ग्रहण में खास दिलचस्पी नहीं थी क्योंकि करीब 90 ईसा पूर्व के एक ग्रंथ में उन्होंने इसे सामान्य घटना कहकर खारिज कर दिया।
भारत में सूर्य ग्रहण से जुड़ी किंवदंती
प्राचीन हिंदू धर्म ग्रंथों और कथाओं में सूर्य ग्रहण की एक बेहद डरावनी और विचलित कर देने वाली व्याख्या मिलती है। कथाओं के मुताबिक, राहु नामक एक धूर्त राक्षस देवताओं का अमृत पीकर अमर होना चाहता था। इसके लिए राहु ने स्त्री का रूप लेकर देवताओं के भोज में शामिल हो गया, लेकिन भगवान विष्णु ने उसका भेद खोल दिया। सजा देने के लिए उन्होंने राक्षस का सिर काट दिया जो आकाश में उड़ता रहता है और यही सिर सूर्य को अंधकारमय कर देता है।
कुछ कथाओं में बताया जाता है कि, राहु असल में अमृत की एक घूंट पीने में सफल हो जाता है, लेकिन अमृत उसके शरीर तक पहुंचने से पहले ही श्रीविष्णु द्वारा उसका सिर काट दिया जाता है। उसका अमर सिर, लगातार सूर्य का पीछा करते हुए कभी-कभी उसे पकड़ लेता है और निगल जाता है लेकिन सूर्य तुरंत फिर प्रकट हो जाता है, क्योंकि राहु का गला नहीं है।

दक्षिण अमेरिका में सूर्य ग्रहण से जुड़ी कथा
दक्षिण अमेरिका के इंका लोग सबसे शक्तिशाली सूर्य देवता इंटी की पूजा करते थे। इंटी को दयालु देवता के रूप में देखा जाता था, लेकिन सूर्य ग्रहण को उनका गुस्सा और अप्रसन्नता का संकेत समझा जाता था। ग्रहण के बाद आध्यात्मिक विद्वान उनके क्रोध का कारण जानने की कोशिश करते थे कि उनका गुस्सा शांत करने के लिए कौन-सा बलिदान देना चाहिए। हालांकि इंका लोग मानव बलि कम ही देते थे।
अफ्रीका में सूर्य ग्रहण से जुड़ी कहानियां
पश्चिम अफ्रीका के कुछ हिस्सों में सूर्य ग्रहण से जुड़ी कहानियां काफी प्रचलित हैं। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, मनुष्य का गुस्सा और लड़ाई सूर्य और चंद्रमा तक फैल गई जिससे वे आपस में लड़ने लगे और ग्रहण लग गया। पौराणिक कथाओं में वर्णित प्रथम माताएं, पुका पुका और कुइयेकोके ने ग्रामीणों से सूर्य और चंद्रमा को शांति का प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे अपना झगड़ा बंद कर दें। ग्रहण के दौरान लोग पुराने झगड़ों को सुलझाते थे ताकि ग्रहण काल खत्म हो जाए।
वियतनाम और कनाडा में सूर्य ग्रहण से जुड़ी कथा
वियतनाम में लोककथाओं के मुताबिक, एक विशाल मेंढक सूर्य को निगल जाता है, फिर उसका स्वामी हान मेंढक को सूर्य को बाहर उगलने के लिए मना लेता है। वही कनाडा के पश्चिमी तट पर रहने वाले क्वाकियूटल लोगों की पारंपरिक मान्यताओं के मुताबिक, सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य को आकाश का एक प्राणी निगल जाता है।
जर्मन पौराणिक कथा क्या कहती हैं?
जर्मन पौराणिक कथाओं के मुताबिक, गर्म स्त्री सूर्य और शीतल पुरुष चंद्रमा का विवाह होता है। सूर्य दिन का स्वामी है, और शांत चंद्रमा रात का। साथी की खोज में चंद्रमा अपनी दुल्हन की ओर आकर्षित होता है और वे मिलकर सूर्य ग्रहण का सृजन करते हैं।
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