Mangal Mahadasha: मंगल की महादशा में हनुमान जी को ऐसे करें प्रसन्न, रातों-रात पलट जाएगी किस्मत
ज्योतिष शास्त्र में मंगल देव को ऊर्जा का कारक माना जाता है, जिनकी महादशा 7 साल तक चलती है। यह करियर में सफलता, आर्थिक मजबूती और आत्मविश्वास बढ़ाती है। ...और पढ़ें

Mangal Mahadasha: मंगल देव को कैसे प्रसन्न करें? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में मंगल देव को ऊर्जा का कारक माना जाता है। मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी ग्रहों के सेनापति मंगल देव हैं। मंगल देव के प्रसन्न रहने पर जातक को करियर में अकल्पनीय लाभ मिलता है। इसके साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। मंगल देव की कृपा से व्यक्ति को पुराने कर्ज से भी मुक्ति मिलती है।

ज्योतिषियों की मानें तो व्यक्ति विशेष को मंगल की महादशा में लाभ मिलता है। मंगल देव की कृपा बरसने से जातक के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है। करियर में सफलता मिलती है। साथ ही काम और क्रोध पर विजय पाने का वरदान मिलता है। अगर आप भी हनुमान जी (Blessings of Bajrangbali) की कृपा पाना चाहते हैं, तो मंगल की महादशा में ये उपाय जरूर करें। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-
मंगल की महादशा (Mars Mahadasha Remedies)
कुंडली में सभी शुभ और अशुभ ग्रहों की महादशा चलती है। शुभ ग्रहों की महादशा में जातक को लाभ मिलता है। वहीं, अशुभ ग्रहों की महादशा में जातक पर अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ज्योतिषियों की मानें तो किसी भी जातक की कुंडली में मंगल की महादशा 7 साल तक चलती है। चंद्र की महादशा के बाद मंगल की महादशा चलती है।
महादशा के दौरान शुभ और अशुभ ग्रहों की अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा चलती है। इनमें सबसे पहले मंगल की अंतर्दशा चलती है। मंगल की महादशा में शुभ ग्रहों की अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा में जातक को हमेशा शुभ फल मिलता है। खासकर, करियर की सभी परेशानी दूर हो जाती है।
खबरें और भी
मंगल देव को कैसे प्रसन्न करें?
- मंगल देव को प्रसन्न करने के लिए प्रत्येक मंगलवार के दिन लाल चीजों का दान करें।
- मंगलवार के दिन पूजा के समय हनुमान जी को सिंदूर (Hanuman Ji Puja Vidhi) अर्पित करें।
- मंगलवार का व्रत रखने से कुंडली में मंगल मजबूत होता है।
- मंगलवार के दिन पूजा के समय हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।
मंगल मंत्र
1. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय
सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।
2. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय रामसेवकाय रामभक्तितत्पराय रामहृदयाय
लक्ष्मणशक्ति भेदनिवावरणाय लक्ष्मणरक्षकाय दुष्टनिबर्हणाय रामदूताय स्वाहा।
3. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय
प्रकट-पराक्रमाय महाबलाय सूर्यकोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।
4. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय रामसेवकाय
रामभक्तितत्पराय रामहृदयाय लक्ष्मणशक्ति
भेदनिवावरणाय लक्ष्मणरक्षकाय दुष्टनिबर्हणाय रामदूताय स्वाहा।
5. ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम,
लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम !
श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे,
रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः !
यह भी पढ़ें- Mangal Antardasha: कितने समय तक चलती है मंगल की अंतर्दशा और कैसे करें ऊर्जा के कारक को प्रसन्न?
यह भी पढ़ें- Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर करें तुलसी पूजा से जुड़ा एक काम, होगी मोक्ष की प्राप्ति
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।