Kharmas 2026: साल में दो बार क्यों लगता है खरमास? समझें इसके पीछे का पूरा गणित
सनातन धर्म में रविवार सूर्य देव को समर्पित है, जिनकी पूजा से करियर और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। खरमास में भगवान विष्णु की पूजा करने से सूर्य देव की कृपा ...और पढ़ें

Kharmas 2026: खरमास का धार्मिक महत्व

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है। इस समय कुमकुम मिश्रित जल से भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया जाता है। साथ ही जप-तप और दान-पुण्य किया जाता है। लाल रंग की चीजों का दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।

ज्योतिषियों की मानें तो सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति विशेष को करियर में मनमुताबिक सफलता मिलती है। साथ ही आरोग्य जीवन का वरदान मिलता है। शास्त्रों में शारीरिक कष्टों (त्वचा संबंधी परेशानी) से मुक्ति के लिए सूर्य देव की उपासना करने का विधान है। लेकिन क्या आपको पता है कि साल में दो बार क्यों खरमास लगता है और खरमास का धार्मिक महत्व क्या है? आइए समझें पूरा गणित-
कब लगता है खरमास?
ज्योतिषियों की मानें तो सूर्य देव एक राशि में 30 दिनों तक रहते हैं। इसके बाद राशि परिवर्तन कर दूसरी राशि में गोचर करते हैं। सूर्य देव के राशि परिवर्तन करने की तिथि पर संक्रांति मनाई जाती है। वहीं, सूर्य देव के गुरु की राशि धनु या मीन में गोचर करने के दौरान खरमास लगता है।
सूर्य देव के धनु और मीन राशि में गोचर करने के दौरान सूर्य के समीप होने से गुरु का प्रभाव क्षीण या शून्य हो जाता है। गुरु शुभ कार्य या मांगलिक कार्य के कारक माने जाते हैं। गुरु का प्रभाव शून्य होने के चलते शुभ काम करने की मनाही होती है। वहीं, सूर्य देव के धनु से निकलकर मकर या मीन से निकलकर मेष राशि में गोचर करने के दिन से शुभ काम किया जाता है।
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खरमास 2026
साल 2026 में आत्मा के कारक सूर्य देव 15 मार्च को मीन राशि में गोचर करेंगे। वहीं, 14 अप्रैल को सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे। अतः 14 मार्च से लेकर 14 अप्रैल तक खरमास रहेगा। इस दौरान शुभ काम नहीं किया जाएगा।
खरमास 2026
सूर्य देव के धनु राशि में गोचर करने के साथ ही खरमास शुरू होगा। इस साल 16 दिसंबर से लेकर 13 जनवरी तक खरमास है। इसके अगले दिन 14 जनवरी को सूर्य देव मकर राशि में गोचर करेंगे। अतः मकर संक्रांति के दिन खरमास समाप्त होगा। खरमास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने से सूर्य और गुरु दोनों की कृपा बरसती है।
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