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    Kharmas 2026: कब से शुरू हो रहा है खरमास? नोट करें मीन संक्रांति का शुभ मुहूर्त और संयोग

    Updated: Mon, 23 Feb 2026 07:24 PM (IST)

    सनातन धर्म में खरमास का विशेष महत्व है, जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में गोचर करते हैं। इस दौरान शुभ कार्य वर्जित होते हैं क्योंकि गुरु का प्रभाव कम ह ...और पढ़ें

    Kharmas 2026: खरमास का धार्मिक महत्व

    Kharmas 2026: खरमास का धार्मिक महत्व 

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में खरमास का खास महत्व है। हालांकि, खरमास के दौरान शुभ काम करने की मनाही होती है। वहीं, खरमास के दौरान सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति विशेष को दोगुना फल मिलता है। कहते हैं कि खरमास के दौरान सूर्य का प्रभाव बढ़ जाता है। इसके लिए खरमास की अवधि में सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि खरमास कब लगता है? आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

    surya dev

    कब लगता है खरमास?

    ज्योतिषियों की मानें तो आत्मा के कारक सूर्य देव के धनु और मीन राशि में गोचर करने के दौरान खरमास लगता है। सूर्य के धनु और मीन राशि में गोचर करने के दौरान गुरु का प्रभाव क्षीण या शून्य हो जाता है। इसके लिए खरमास के दिनों में शुभ काम करने की मनाही होती है।

    संक्रांति (Meen Sankranti 2026 Muhurat)

    सूर्य देव के राशि परिवर्तन करने की तिथि पर संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य देव के मीन राशि में गोचर करने पर मीन संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है। साथ ही जप-तप और दान-पुण्य किया जाता है।

    कब से शुरू होगा खरमास? (Kharmas 2026 Start and End Date)

    ज्योतिष गणना अनुसार, आत्मा के कारक सूर्य देव 15 मार्च को कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में गोचर (Sun Transit in Pisces) करेंगे। मीन राशि में सूर्य देव के गोचर से खरमास शुरू होगा। इस दिन से सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य पर विराम लग जाएगा। वहीं, 14 अप्रैल को खरमास समाप्त होगा।

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    सूर्य मंत्र

    जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम ।
    तमोsरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोsस्मि दिवाकरम ।।

    2. ऊँ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यण्च ।
    हिरण्य़येन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन ।।

    3. ऊँ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात ।।

    4. ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय सहस्रकिरणाय नमः

    5. ध्याये न्नृसिंहं तरुणार्कनेत्रं सिताम्बुजातं ज्वलिताग्रिवक्त्रम्।
    अनादिमध्यान्तमजं पुराणं परात्परेशं जगतां निधानम्।।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।