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    वाराणसी के इन 5 पौराणिक मंदिरों के दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है काशी यात्रा, स्‍कंद पुराण में मिलता है उल्लेख

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 04:30 PM (IST)

    मोक्षदायिनी काशी के इन 5 पौराणिक एवं पवित्र मंदिरों के दर्शन करके अपनी धार्मिक यात्रा को पूर्ण व सफल बनाएं। ...और पढ़ें

    काशी के सबसे प्राचीन मंदिर (Picture Credit- AI Generated)

    काशी के सबसे प्राचीन मंदिर (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। काशी को मोक्षदायिनी कहा जाता है। कहते हैं कि जीवनकाल में एक बार भी काशी नगरी के दर्शन हो जाएं, तो मोक्ष मिल जाता है, मगर यह मोक्ष इतनी आसानी से कहां मिलता है। स्कंद पुराण के 'काशी खंड' का पहला श्लोक है,

    विश्वेशं माधवं धुण्डिं दण्डपाणिं च भैरवम्।

    वन्दे काशीं गुहां गङ्गां भवानीं मणिकर्णिकाम॥'

    जिसका साफ अर्थ है कि काशी धाम की यात्रा केवल विश्‍वनाथ ज्‍योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से पूरी नहीं होती है।

    हिंदू धर्म में बहुत सारे तीर्थ हैं, जिनका अलग-अलग धार्मिक महत्‍व रहा है। लेकिन काशी विश्‍वनाथ को हिंदु धर्म में एक धाम बताया गया है, जिसकी यात्रा वाराणसी में मौजूद कुछ अन्‍य विशेष मंदिरों की चौखट पर माथा टेकने के बाद ही पूरी होती है।

    चलिए इन मंदिरों के बारे में आपको बताते हैं।

    काल भैरव मंदिर

    काल भैरव काशी के कोतवाल हैं। काशी में घुसते ही सबसे पहले इनके दरबार में हाजिर होना जरूरी है।बिना इनकी अनुमति के काशी विश्‍वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन संभव नहीं हैं।

    माता अन्‍नपूर्ण मंदिर

    ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद माता अन्नपूर्णा के दर्शन भी जरूरी हैं। यह काशी की अन्न की देवी हैं। पुराणों में उल्लेख है कि जो व्यक्ति यहां आता है, उसे जीवन में अन्न की कमी कभी नहीं होती है।

    धुंडीराज विनायक मंदिर

    काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही आपको गणेश जी का प्राचीन मंदिर मिल जाएगा। इनके दर्शन के बिना ज्योतिर्लिंग के दर्शन अधूरे हैं। इनके दर्शन के बाद आपको महादेव के दर्शन करने से कोई नहीं रोक सकता है।

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    बिंदु माधव मंदिर

    यह मंदिर वाराणसी के पंचगंगा घाट पर स्थित है। यहां भगवान विष्णु विराजमान हैं। मान्यता है कि यही वह स्थान है, जहां भगवान विष्णु ने महादेव की तपस्या की थी। इनके दर्शन के बिना भी काशी की यात्रा अधूरी रहती है।

    विशालाक्षी मंदिर

    51 शक्तिपीठों में से एक विशालक्षी मंदिर भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्‍सा है। यह मंदिर मणिकर्णिका घाट पर है। यहां पर माता सती के दाहिने कान के कुंडल गिरे थे। इसलिए बहुत जरूरी है कि आप यहां आकर देवी के दर्शन जरूर करें।

    दंडपाणि मंदिर

    यह मंदिर काशी के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। यहां के दर्शन भी जरूरी है। यहां की विशेषता यह है कि यहां काशी का न्यायाधीश कहे जाने वाले हरिकेश देव की पूजा होती है। यह हाथ में छड़ी लिए हुए हैं। कहा जाता है कि यह काशी में किसी भी गलत व्‍यक्ति को नहीं रहने देते हैं।

    अतः आप यदि काशी यात्रा पर जा रहे हैं, तो एक बार आपको इन मंदिरों के दर्शन जरूर करने चाहिए।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।