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ऐसा मंदिर जहां एक ही परिसर में मौजूद हैं ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ, जानिए बाबा बैद्यनाथ का रहस्य

Published: Mon, 20 Jul 2026 02:00 PM (GMT+05:30)

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर एक अनूठा धार्मिक स्थल है जहां ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों मौजूद हैं। ...और पढ़ें

बैद्यनाथ मंदिर का रहस्य

बैद्यनाथ मंदिर का रहस्य

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जहां-जहां माता सती का अंग गिरे थे। वहां पर शक्तिपीठों का निर्माण हुआ। माता सती के 51 शक्तिपीठों में बैद्यनाथ मंदिर (Baidyanath Temple) भी शामिल है। यहां पर माता सती का हृदय गिरा था, जिसके बाद इस शक्तिपीठ का निर्माण हुआ।

क्या आपको पता है कि बैद्यनाथ मंदिर शक्तिपीठ के अलावा ज्योतिर्लिंगों में भी शामिल है। जी हां, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बैद्यनाथ मंदिर में ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ मौजूद हैं। झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ बैद्यनाथ मंदिर को देशभर में श्रद्धा और आस्था का एक अद्भुत केंद्र माना जाता है। इस मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शन और पूजा-पाठ करने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं बैद्यनाथ मंदिर से जुड़ी कथा के बारे में।

शक्तिपीठ कैसे बना बैद्यनाथ मंदिर?

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दक्ष के द्वारा भगवान शिव का अपमान करने पर माता सती को क्रोध आया, तो उन्होंने यज्ञ की अग्नि में कूदकर प्राण त्याग दिए। इसके बाद भगवान शिव को क्रोध आया और माता सती के शरीर को लेकर तांडव करने लगे। इस स्थिति में भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र की मदद से माता सती के शरीर के 51 हिस्से कर दिए। जहां-जहां माता सती के अंग गिरे, वहां पर शक्तिपीठ का निर्माण हुआ। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवघर के इसी पवित्र स्थान पर माता सती का हृदय गिरा था। इसी वजह से इसे हृदय पीठ कहा जाता है। इस शक्तिपीठ में मां पार्वती के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है।

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 (Picture Credit: Instagram) 

12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां पर ज्योतिर्लिंग स्वयंभू प्रकट हुआ था। इसी वजह से बाबा बैद्यनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। लंबे समय से ज्योतिर्लिंग की पूजा-अर्चना की जाती रही है। बाबा बैद्यनाथ मंदिर के गर्भगृह एक ज्योतिर्लिंग स्थापित है। इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा-अर्चना करने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग में रोग ठीक करने की शक्ति है। इसी वजह से भगवान शिव को बैद्यनाथ कहा जाता है।

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में लगता है श्रावणी मेला

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में हर वर्ष सावन के महीने में श्रावणी मेला लगता है। इस दौरान अधिक संख्या में भक्त दूर-दूर से आते हैं। श्रावणी मेले के समय बेहद भव्य नजारा देखने को मिलता है। यह प्रसिद्ध मेला 1 महीने तक लगता है।

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Source- Baidyanath Temple

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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