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    मंदिर के शिखर का दर्शन क्यों माना जाता है शुभ? क्या है इसका धार्मिक महत्व

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 01:02 PM (IST)

    शास्त्रों में मंदिर के शिखर दर्शन को अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण बताया गया है, जिससे सभी पाप नष्ट होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह दर्शन भ ...और पढ़ें

    मंदिर के शिखर दर्शन का धार्मिक महत्व और पुण्य प्राप्ति के लाभ (Picture Credit: AI Generated)

    मंदिर के शिखर दर्शन का धार्मिक महत्व और पुण्य प्राप्ति के लाभ (Picture Credit: AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पूजा की सर्वोत्तम जगह और हमारी आस्था का केंद्र मंदिर देवताओं का आशीर्वाद पाने और मन को शांति दिलाने का एक सबसे अच्छा स्थान माना जाता है।

    इन्हीं मंदिरों में मूर्ति स्थान या गर्भ ग्रह के ऊपर पिरामिड आकार की जो संरचना होती है उसे शिखर कहा जाता है। यही नहीं शिखर मंदिर के बाहर से देखने पर जो सबसे ऊंचाई पर स्थित केंद्र होता है उसे भी कहा जाता है।

    शिखर संस्कृत भाषा का शब्द है और जहां एक तरफ इसे उत्तर भारत में शिखर के नाम से जानते हैं वही दक्षिण भारत में इसे विमानन कहा जाता है।

    शास्त्रों में मंदिर के शिखर दर्शन का बड़ा महत्व है और ऐसा कहा जाता है कि मंदिर में प्रवेश के समय शिखर दर्शन करना बहुत जरूरी है। इससे मंदिर की पूरी सकारात्मक ऊर्जा आपके भीतर आ सकती है। आइए जानें मंदिर के शिखर का दर्शन क्यों जरूरी माना जाता है और इसका महत्व क्या है?

    शिखर दर्शन क्यों है जरूरी?

    शास्त्रों में यह कहा गया है कि 'शिखर दर्शनं पाप नाशं', अर्थात् मंदिर के शिखर के दर्शन मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे भक्तों को मंदिर दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है।

    यह भी माना जाता है कि शिखर के दर्शन करने से वही पुण्य प्राप्त होता है जो मंदिर में भगवान की प्रतिमा के दर्शन करने से होता है। इसी वजह से मंदिर का शिखर इतनी ऊंचाई पर स्थित होता है जिससे कोई भी आसानी से वहां जाकर शुभ फल प्राप्त कर सके। यही नहीं अगर आप किसी कारण से मंदिर दर्शन नहीं भी कर पा रहे हैं तो शिखर के दर्शन से मंदिर के समान ही फल मिल सकता है।

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    शिखर दर्शन का महत्व क्या है?

    शिखर दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं और आपको पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है। यह भी माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति मंदिर दर्शन करने के बाद भी शिखर के दर्शन नहीं करता है, तो पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं मिलता है।

    इसी कारण से शिखर को ऊंचा बनाने के साथ-साथ इसमें एक ध्वज भी फहराया जाता है। जिससे सभी भक्तों की नजर इस पर पड़े और वो आसानी से उस स्थान के दर्शन करें। मान्यता है कि शिखर दर्शन से देव विग्रह के दर्शन का पुण्य मिलता है।

    मंदिर के शिखर दर्शन कैसे करें?

    आप पूजा के लिए जब भी मंदिर जाते हैं, सबसे पहले उसके शिखर के दर्शन करें। इसके लिए सबसे पहले उसकी ध्वजा और कलश को प्रणाम करें।

    शिखर को देखते हुए अपनी आंखें बंद करें और अपने इष्टदेव का ध्यान करते हुए अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद आप मंदिर की पहली सीढ़ी या दहलीज को झुककर प्रणाम करें तब अंदर जाने के लिए कदम बढ़ाएं। शिखर दर्शन के लिए जाते समय मंत्रों का जाप करें। कोशिश करें कि जिस समय आप शिखर दर्शन करें उस समय अपने इष्ट देव के मंत्रों का ही जाप करें। जैसे यदि शिव जी आपके इष्ट देव हैं तो आप 'ॐ नमः शिवाय मंत्र' का जाप करें।

    इस प्रकार मंदिर में प्रवेश से पहले शिखर दर्शन को जरूरी माना जाता है और इसके फायदे यह हैं कि आपके जीवन में भी सकारात्मक ऊर्जा का वास हो सकता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।