रात के समय घर के मंदिर का दरवाजा खुला रखना सही या गलत? क्या कहता है वास्तु शास्त्र
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मंदिर के द्वार से जुड़े भी कुछ नियम बनाए गए हैं जिनका पालन जरूरी माना जाता है। सही समय पर मंदिर का दरवाजा खोलना या बंद ...और पढ़ें

रात में घर के मंदिर का द्वार बंद करना क्यों है जरूरी (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जिस प्रकार घर के हर कोने और वस्तु के लिए वास्तु के नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है, वैसे ही सबसे ज्यादा जरूरी माना जाता है घर के मंदिर का सही दिशा में होना।
घर जा मंदिर एक ऐसा स्थान होता है जहां हम मानसिक शांति की तलाश में जाते हैं और ईश्वर के सामने अपने सभी कष्टों का निवारण करने की प्रार्थना करते हैं।
जिस तरह दिशा का सही होना जरूरी है वैसे ही कुछ अन्य नियम भी बनाए गए हैं जो मंदिर के लिए ध्यान में रखने की सलाह दी जाती है।
उन्हीं में से एक है मंदिर का द्वार पूजन के बाद बंद करना। आमतौर पर मंदिर का द्वार दिन के समय कुछ देर के लिए बंद किया जाता है और रात्रि के समय भी ईश्वर के आराम का समय माना जाता है और इस दौरान यदि आप मंदिर का द्वार बंद करें या फिर इसमें पर्दा लगाएं तो ये वास्तु अनुकूल माना जाता है। आइए आपको बताते हैं घर के मंदिर के द्वार से जुड़े कुछ वास्तु नियमों के बारे में।
घर के मंदिर में दरवाजा होना क्यों है जरूरी
अक्सर आपके मन में यह सवाल आता होगा कि क्या घर के मंदिर में दरवाजा होना जरूरी है? अगर वास्तु की मानें तो यह जरूरी है क्योंकि यदि घर के मंदिर में दरवाजा नहीं होगा तो पूरे घर को ही मंदिर का रूप मान लिया जाएगा। ऐसे में आप मंदिर की पवित्रता बनाए नहीं रख सकते हैं, तो यह ईश्वर का अपमान माना जाता है।
यदि आपके घर में एक अलग पूजा कक्ष है तो उसमें दरवाजा होना चाहिए, लेकिन यदि घर में स्थान की कमी है और छोटा सा मंदिर है तो आप उसमें पर्दा भी डालकर रख सकते हैं। क्योंकि यदि कोई दरवाजा या पर्दा नहीं होगा तो पूरा घर ही मंदिर बन जाएगा और फिर आपको घर के सामान्य कामकाज में भी परेशानी होगी।
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क्या रात के समय मंदिर का द्वार बंद करना जरूरी है?
आप चाहे घर के मंदिर की बात करें या फिर बाहर की, कहीं भी रात के समय दरवाजा बंद करना जरूरी माना जाता है। वास्तु में ऐसा कहा जाता है कि आप रात्रि में शयन आरती की बाद घर के मंदिर का द्वार बंद करें। यदि किसी वजह से मंदिर में द्वार न हो तब भी उसमें पर्दा डालना शुभ होता है।
जिस प्रकार हमें दिनभर के काम के बाद आराम की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार से भगवान को भी आराम करने के लिए रात के समय उन्हें शांति वाला माहौल देने की जरूरत होती है। इस वजह से आप मंदिर अवश्य रात के समय बंद कर दें।
मंदिर का द्वार बंद करना देवताओं के प्रति सम्मान
घर के मंदिर का द्वार रात के समय बंद करने से देवताओं के प्रति सम्मान दिखाया जाता है। यदि आप ऐसा करते हैं तो देव प्रसन्न होते हैं और रात्रि के समय मंदिर के भीतर पूर्ण ऊर्जा का संग्रह होता है।
जब रात भर मंदिर का कपाट बंद होता है तो सभी ईश्वरों की ऊर्जा एक साथ मंदिर के भीतर संग्रहित होने लगती है। ऐसे में जो व्यक्ति सुबह सबसे पहले मंदिर के कपाट खोलता है या फिर पर्दा हटाता है उसके ऊपर पूर्ण रूप से ऊर्जा का प्रवाह होता है और मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की ऊर्जा बढ़ती है।
वास्तु की मानें तो घर के मंदिर को रात के समय दरवाजे से बंद कर देना ही उचित है या फिर आप इस स्थान पर पर्दा लगाकर भी ईश्वर को विश्राम करवा सकते हैं।
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