हर 12 साल में बिजली से टूटता है शिवलिंग, फिर मक्खन और सत्तू से ऐसे जुड़ते हैं बिजली महादेव
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित बिजली महादेव मंदिर एक रहस्यमयी स्थान है, जहाँ हर 12 साल में शिवलिंग पर बिजली गिरती है और वह खंडित हो जाता है। पुजारी ...और पढ़ें

बिजली महादेव मंदिर का रहस्य

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना महादेव को प्रिय है। यह पवित्र महीना महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस माह में शिव मंदिरों में भक्त महादेव के दर्शनों के लिए पहुँचते हैं और शिव जी का जलाभिषेक करते हैं।
इस दौरान मंदिरों में खास रौनक देखने को मिलती है। देशभर में महादेव को समर्पित कई मंदिर हैं, जो किसी न कारण से प्रसिद्ध हैं। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित एक ऐसा मंदिर है, जो रहस्यमयी और अद्भुत मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में महादेव के दर्शनों के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं।
इस मंदिर के बारे में ऐसा जाता है कि एक बार मंदिर के शिवलिंग पर बिजली गिरी थी, जिसके कारण शिवलिंग टूट गया था और हर 12 साल में शिवलिंग पर बिजली गिरती है। मंदिर में महादेव के भक्तों के दर्शन करने के लिए अधिक संख्या में आते हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इस मंदिर के रहस्य के बारे में।
कैसे पड़ा बिजली महादेव मंदिर का नाम
ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर के शिवलिंग के ऊपर के एक बार बिजली गिरी थी, जिसकी वजह शिवलिंग के कई टुकड़े हो गए थे। इसके बाद मंदिर के पुजारियों ने मक्खन और सत्तू की मदद से शिवलिंग को जोड़ा था। इसी वजह से इस मंदिर का नाम बिजली महादेव मंदिर पड़ा। शिवलिंग की घटना आज के समय लोगों को आकर्षित करती है। इस मंदिर की बनावट पारंपरिक हिमाचली शैली की है। इस मंदिर की लकड़ियों पर नक्काशी और बारीक डिजाइन देखने को मिलती है।
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गर्भगृह में स्थापित है शिवलिंग
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर के शिवलिंग पर हर 12 साल में बिजली गिरती है, जिसके बाद मक्खन से खंडित शिवलिंग को जोड़ा जाता है। बिजली महादेव मंदिर में एक शिवलिंग स्थापित है। मंदिर में मंत्रों के द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है, जिसकी वजह से मंदिर और आसपास की पहाड़ियों में दिव्य शांति होती है। यह मंदिर कुल्लू घाटी में कशावरी गांव में स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को घने जंगलों के बीच से निकलना पड़ता है।
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मंदिर से जुड़ी कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, कुलांत नाम का राक्षस था। वे कुल्लू घाटी को डुबाना चाहता था। इसके लिए उसने अजगर का रूप धारण किया। इसके बाद उसने लोगों को डराना शुरू किया। इस दौरान महादेव प्रकट हुए और उन्होंने उसकी पूंछ में आग लगा दी। इसी वजह से उसकी मृत्यु हुई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उस दैत्य के विशाल शरीर के कारण ही कुल्लू घाटी के पहाड़ों का निर्माण हुआ। इसके बाद वहां पर बिजली महादेव की स्थापना हुई।
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Temple Source- Bijli Mahadev Temple
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