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    Hemkund Sahib History: दो सदियों तक दुनिया की नजरों से दूर रहा यह पावन धाम, पढ़ें इसका रहस्यमयी इतिहास

    Updated: Tue, 06 Jan 2026 02:55 PM (IST)

    उत्तराखंड में गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब (Gurudwara Hemkund Sahib History) स्थित है, जो हिमनद झील के किनारे बना हुआ है। यह सिख धर्म के अनुयायियों के लिए ...और पढ़ें

    Gurudwara Hemkund Sahib History In hindi

    Gurudwara Hemkund Sahib History In hindi

    HighLights

    1. दो सदियों तक यह पवित्र स्थल रहा गुमनाम

    2. गुरु गोबिंद सिंह जी ने की थी यहां तपस्या

    3. लक्ष्मण जी से भी जुड़ा है यहां का इतिहास

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हेमकुंड साहिब की तीर्थ यात्रा, सबसे कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक है, क्योंकि यह गुरुद्वारा समुद्र तल से 15 हजार फुट से ऊपर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां केवल पैदल यात्रा करके ही पहुंचा जा सकता है। कठिन यात्रा के बाद भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस यात्रा को पार करते हुए हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए जाते हैं। साथ ही इस स्थान का संबंध लक्ष्मण जी के साथ भी माना जाता है। चलिए जानते हैं इस बारे में।

    हेमकुंड साहिब का इतिहास

    दसम ग्रंथ में यह वर्णन मिलता है इस स्थान पर सिखों के दसवें और अंतिम गुरु अर्थात श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने पिछले जन्म में कठिन तपस्या की थी। यही कारण है कि सिख धर्म में हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा का इतना अधिक महत्व है। साथ ही हिंदू धर्म में भी यह स्थान उतना ही महत्व रखता है, क्योंकि यह मान्यता है कि रामायण काल में इसी स्थान पर लक्ष्मण जी ने ध्यान किया था। यहां लक्ष्मण जी द्वारा स्थापित एक मंदिर भी है।

    Hemkund Sahib AI

    (AI Generated Image)

    हेमकुंड साहिब को कैसे मिली पहचान

    हेमकुंड की खोज के पीछे भी एक रोचक कथा है। दो से भी अधिक सदियों तक श्री हेमकुंड साहिब गुमनामी में रहा। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा बिचित्र नाटक में इस स्थान का जिक्र किया, जिसके बाद यह स्थान अस्तित्व में आया। इसके साथ ही पंडित तारा सिंह नरोत्तम हेमकुंड की भौगोलिक स्थिति का पता लगाने वाले पहले सिख माने जाते हैं। श्री गुड़ तीरथ संग्रह में उन्होंने हेमकुंड साहिब को 508 सिख धार्मिक स्थलों में से एक बताया।

    गुरुद्वारे से जुड़ी कुछ खास बातें

    हेमकुंड एक संस्कृत नाम शब्द है, जिसका अर्थ है हेम अर्थात बर्फ और कुंड अर्थात कटोरा। बर्फ से घिरे कटोरे जैसी झील के कारण इस स्थान का नाम हेमकुंड पड़ा। पहाड़ों से घिरी इस जगह पर एक बड़ा तालाब भी है, जिसे लोकपाल (लोगों का पालनहार) कहते हैं।

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