क्यों बजरंगबली के बिना अधूरे हैं अयोध्या में श्रीराम के दर्शन? पढ़ें हनुमान गढ़ी मंदिर का रहस्य
अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर का विशेष महत्व है, जहां हनुमान जी रक्षक के रूप में विराजमान हैं। मान्यता है ...और पढ़ें

हनुमान गढ़ी मंदिर (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में हनुमान जी को समर्पित कई मंदिर हैं, जिनका विशेष महत्व है। इन्हीं मंदिरों में शामिल है आयोध्या का हनुमान गढ़ी मंदिर (Hanuman Garhi Temple)। यह मंदिर आस्था का केंद्र है। मंदिर एक ऊंचे टीले पर स्थित है, जहां पहुंचने के लिए 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
हनुमान गढ़ी मंदिर में बजरंबली के दर्शन करने के बाद ही रामलला के दर्शन का शुभ फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में हनुमान जी रक्षक के रूप में वास करते हैं। मंदिर में भक्तों को आने पर खास ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है। किसी खास अवसर पर मंदिर में भक्तों को भारी भीड़ देखने को मिलती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इस मंदिर से जुड़े रहस्य के बारे में।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम रावण की लंका पर विजय हासिल करने के बाद जब अयोध्या आए, तो नगरी में प्रभु श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के आने का उत्साह मनाया जा रहा था। भगवान राम का राज्याभिषेक हुआ। इसके बाद राम जी ने सभी को विदा किया, लेकिन हनुमान जी अयोध्या को छोड़कर नहीं जाना चाहते थे।
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(Image Source: AI-Generated)
राम जी ने हनुमान जी को दी ये जगह
बजरंगबली की भक्ति और प्रेम से खुश होकर श्रारीम ने हनुमान जी को अयोध्या में ही रहने के लिए एक जगह दी। यह स्थान एक ऊंचे टीले पर मौजूद थी, जहां पर हनुमान गढ़ी मंदिर को बनाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऊंचे टीले पर मौजूद होने की वजह से हनुमान जी को यहां से पूरी अयोध्या नगरी दिखाई देती थी। रहने के लिए यह स्थान देते हुए रामजी ने यह भी वचन दिया कि अयोध्या में मेरा दर्शन तब तक पूरा नहीं माना जाएगा, जब तक हनुमान गढ़ी के दर्शन नहीं किए जाएंगे।
सभी मुरादें होती हैं पूरी
इस प्रसंग का वर्णन स्कंद पुराण में देखने को मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान गढ़ी मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करने से भक्त के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही हनुमान जी कृपा प्राप्त होती है। मंदिर में हनुमान जी को चोला अर्पित करने से सभी दोष की समस्या से छुटकारा मिलता है।
इस मंदिर में माता अंजनी की गोद में बाल हनुमान की प्रतिमा विराजमान है, जिनके दर्शन करने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबित इस मंदिर का निर्माण राजा विक्रमादित्य द्वारा करवाया गया है। मंदिर में पहुँचने के लिए भक्तों को 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
Source: ayodhya.nic.in
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