हरसिद्धि माता मंदिर: बेहद रहस्यमयी है उज्जैन का ये शक्तिपीठ, जहां गिरी थी माता सती की कोहनी
उज्जैन का हरसिद्धि माता मंदिर एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है, जहाँ माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी। यह मंदिर महाकालेश्वर के पास स्थित है और अपनी पौराणिक क ...और पढ़ें

हरसिद्धि मंदिर की कथा आपको हैरान कर देगी

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पूरे भारत में अलग-अलग स्थानों पर मां सती के शक्तिपीठ स्थापित हैं। मां सती के अंगों से 51 शक्तिपीठो का निर्माण हुआ, जिनमें उज्जैन का हरसिद्धि माता मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास स्थित है।
नवरात्र या फिर किसी अवसर के दौरान मंदिर में भव्य नजारा देखने को मिलता है। अधिक संख्या में भक्त हरसिद्धि माता (Harsiddhi Mata Temple) के दर्शनों के लिए मंदिर पहुंचते हैं। आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इस मंदिर से जुड़ी कथा और महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में।
इस तरह बना हरसिद्धि माता शक्तिपीठ मंदिर
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब माता सती के शरीर के अंग जहां-जहां गिरे, वे सभी स्थान शक्तिपीठ में बदल गए। जहां पर माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी, उसी जगह पर हरसिद्धि माता मंदिर को बनाया गया। यह मंदिर शक्ति का केंद्र माना जाता है।

(Pic Credit- Instagram)
हरसिद्धि माता शक्तिपीठ मंदिर की कथा
उज्जैन के पवित्र स्थलों में हरसिद्धि माता शक्तिपीठ मंदिर शामिल है। मंदिर में महालक्ष्मी और महासरस्वती की मूर्ति विराजमान है। इन मूर्ति के बीच में मां अन्नपूर्णा की मूर्ति स्थापित है। इसके अलावा श्री यंत्र भी स्थापित है, जिसकी विशेष पूजा-अर्चना होती है। शिव पुराण के मुताबिक, जब भगवान शिव यज्ञ की अग्नि में से मां सती के जलते हुए शरीर को उठा कर ले जा रहे थे, तो मां सती की दाहिनी कोहनी इसी जगह पर गिरी थी। इसके बाद इसी जगह पर हरसिद्धि माता शक्तिपीठ मंदिर बना।
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स्कंद पुराण में बताया गया है कि किस तरह से देवी चंडी हरसिद्धि की उपाधि हासिल हुई। पौराणिक कथा के अनुसार,
जब भगवान शिव मां पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर एकांत में थे, तो उस दौरान दो राक्षसों ने उनके पास आने की कोशिश की। उनका नाम चंड और प्रचंड था। महादेव ने राक्षसों को नष्ट करने के लिए चंडी को बुलाया। चंडी ने राक्षसों को नष्ट किया। इससे महादेव प्रसन्न हुए और चंडी देवी को 'सब पर विजय पाने वाली' उपाधि प्रदान की।
इस मंदिर का पुनर्निर्माण मराठा काल के समय किया गया था। मंदिर में 2 स्तंभ भी है। रोजाना शाम को इन स्तंभों पर दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं। इस दौरान मंदिर में बेहद भव्य नजारा देखने को मिलता है। इस दृश्य को देखने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं।
Source: ujjain.nic.in
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