Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    कानपुर के इस शिव मंदिर में क्यों चढ़ाई जाती हैं घड़ियां, जानिए 'समय देव' की अनोखी परंपरा

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 08:00 AM (GMT+05:30)

    कानपुर के नवाबगंज में एक अनोखा शिव मंदिर है, जिसे 'समय देव का मंदिर' कहा जाता है, जहां भक्त मन्नत पूरी होने पर घड़ियां चढ़ाते हैं और प्रसाद में भी घड़िया ...और पढ़ें

    कानपुर के इस शिव मंदिर में चढ़ाई जाती हैं घड़ियां (Picture Credit- AI Generated)

    कानपुर के इस शिव मंदिर में चढ़ाई जाती हैं घड़ियां (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. कानपुर के नवाबगंज में स्थित है 'समय देव का मंदिर'।

    2. भक्त मन्नत पूरी होने पर भगवान को घड़ियां चढ़ाते हैं।

    3. यहां शिव को समय देव के रूप में पूजा जाता है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में अनेक प्रकार की भाषाएं, परंपराएं और रीति-रिवाज हैं, इसके साथ ही ईश्‍वर की पूजा करने का तरीका भी सभी लोगों का अलग-अलग है। जगह बदलते ही मान्‍यताएं भी बदल जाती हैं और इसी के साथ-साथ लोगों का विश्वास भी बदलता जाता है।

    उत्तर प्रदेश के महानगरों में से एक कानपुर भी गंगा किनारे बसा है और जहां गंगा है वहां शिव जी के भक्तों का कभी अभाव नहीं होता है। कानपुर में भी महादेव के सैकड़ों मंदिर हैं, मगर एक मंदिर बेहद खास है, क्योंकि यहां पर भगवान शिव के साथ-साथ समय की भी पूजा होती है।

    जी हां, आपने सही सुना समय यानी टाइम की पूजा। चलिए आज हम आपको इस विशेष धार्मिक स्‍थल के बारे में बताते हैं।

    कहां है यह मंदिर?

    यह कोई बहुत विशाल या फिर लोकप्रिय मंदिर नहीं है। बस यहां पर पूजा और प्रसाद बांटने की जो परंपरा निभाई जाती है, वही इस मंदिर को सबसे अलग कर देती है।

    कानपुर के नवाबगंज इलाके में एक बूढ़ा पीपल है। उसी का सहारा लेकर एक छोटा सा मंदिर बना हुआ है। मंदिर इतना छोटा है कि एक साथ 10 लोग अंदर नहीं घुस सकते हैं, मगर यहां भक्‍तों का हमेशा ही मेला लगा रहता है। खासतौर पर जिनकी कोई मन्‍नत पूरी होती है, वह यहां जरूर आते हैं।

    कौन हैं 'समय देव'?

    भगवान शिव को महाकाल कहा गया है। काल यानी समय, तो तो यहां पर समय देव के रूप में शिव जी ही विराजमान हैं यहां पर एक छोटा सा शिवलिंग है, जिसकी पूजा की जाती है, मगर उन्‍हें समय देव के नाम से पुकारा जाता है।

    खबरें और भी

    क्‍या है परंपरा?

    इस मंदिर की परंपरा है कि भोग के रूप में लोग यहां घड़ी चढ़ाते हैं और मन्‍नत पूरी होने पर भी घड़ी का ही चढ़ावा चढ़ता है। इतना ही नहीं, प्रसाद में भी घड़ी ही बंटती हैं। दरअसल, यहां भक्‍तों द्वारा चढ़ाई गई घडि़यों की संख्‍या इतनी ज्‍यादा हो जाती है कि पंडित जी प्रसाद में वही घडि़यां बांट भी देते हैं।

    इस मंदिर से जुड़ा लोगों का अटूट विश्‍वास है कि समय देव उनके बुरे वक्‍त को जल्‍दी दूर कर देंगे और अच्‍छे दिन जल्‍दी आ जाएंगे। सावन के समय पर इस मंदिर में भक्‍तों की विशेष भीड़ लगती है।

    क्‍या है कथा ?

    इस मंदिर की कथा बहुत रोचक है। स्थानीय लोग कहते हैं कि कानपुर का एक व्‍यापारी गुजरात गया था। वहां भी एक समय देव का मंदिर है। इस मंदिर में उसने मन्‍नत मांगी थी कि अगर उसका काम हो गया तो वह अपने शहर में ऐसा ही एक मंदिर बनाएगा। जब उसका काम हो गया और वह कानपुर वापस आया, तो उसने समय देव के रूप में शिवलिंग को स्‍थापित किया। बस तब से कानपुर का यह समय देव मंदिर लोकप्रिय हुआ और भक्त यहां अपनी मन्‍नत पूरी होने पर घड़ियां चढ़ाने लगे।

    अत: आप कानपुर में हों या कानपुर आ रहे हों, तो इस अनोखे मंदिर के दर्शन करना न भूलें।

    अत: जीवन में आपको किसी भी प्रकार का भय या फिर तकलीफ हो, दुर्गा चालीसा का रोजाना पाठ करना आपको भयमुक्‍त कर सकता है।

    यह भी पढ़ें- कानपुर का अनोखा मंदिर: जहां मानसून आने से 7 दिन पहले ही छत की बूंदें देती हैं बारिश के संकेत

    यह भी पढ़ें- 'आसमान नहीं गिर पड़ेगा', राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में तुरंत सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।