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    कानपुर का अनोखा मंदिर: जहां मानसून आने से 7 दिन पहले ही छत की बूंदें देती हैं बारिश के संकेत

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 01:10 PM (IST)

    कानपुर के भीतरगांव में स्थित जगन्नाथ मंदिर अपनी अनूठी मानसून भविष्यवाणी के लिए प्रसिद्ध है। यहां बारिश से सात दिन पहले छत से पानी टपकना शुरू हो जाता ह ...और पढ़ें

    कानपुर का बेहटा मानसून मंदिर (Picture Credit- AI Generated)

    कानपुर का बेहटा मानसून मंदिर (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत जिसे मंदिरों का देश भी कहा जाता है, जहां कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो विज्ञान के नियमों को चुनौती देते हैं। यह बात शायद ही कोई कल्पना करेगा कि, भारत में एक ऐसा भी मंदिर है, जो मानसून की दस्तक से पहले ही इस बात के संकेत देता है कि, इस साल बारिश अच्छी, मध्यम या फिर निम्न रहेगी।

    हैरान मत होइए यह मंदिर उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद के भीतरगांव विकासखंड मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर बेंहटा गांव में स्थित है। यह मंदिर जगन्नाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।

    बारिश से 7 दिन पहले मानसून के मिलते हैं संकेत

    माना जाता है कि, इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि, बारिश से 7 दिन पहले ही इसकी छत से बारिश की कुछ बूंदे अपने आप टपकनी शुरू हो जाती है। वैज्ञानिक इसके पीछे का रहस्य जानने के लिए कई बार तमाम सर्वेक्षण कर चुके हैं, बावजूद इसके वे निर्माण और रहस्य का सही समय पता नहीं लगा सके।

    वैज्ञानिक केवल इसी नतीजे पर पहुंच सके कि मंदिर का आखिरी बार जीर्णोद्धार 11वीं सदी के आसपास हुआ था। उससे पूर्व कितने बार जीर्णोद्धार हुआ या इसका निर्माण किसने और कब कराया आज भी रहस्य बना हुआ है, लेकिन बारिश की जानकारी पहले लग जाने के कारण किसानों के बीच इस मंदिर के प्रति अटूट आस्था है।

    कानपुर बेहटा जगन्नाथ मंदिर  (1)

    कानपुर बेहटा जगन्नाथ मासून मंदिर (AI Image)

    मंदिर से जुड़ा रहस्य

    इस ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर के अंदर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा की काले रंग की मूर्ति स्थापित है। स्थानीय लोगों का मानना है कि, इस मंदिर में मानसून आने से पहले ही छत से पानी टपकना व बरसात के दौरान मंदिर के भीतर पानी की एक बूंद भी न आना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

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    कानपुर के बेहटा गांव में स्थित भगवान जगन्नाथ का हजारों साल पुराना इस मंदिर में बारिश आने से पहले गुंबद भीगने लगते हैं, जो मानसून के दस्तक का संकेत माना जाता है। जगन्नाथ पुरी धाम की ही तरह इस मंदिर में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा स्थानीय लोगों द्वारा निकाली जाती है।

    पानी की बूंदों पर निर्भर करती है बारिश

    स्थानीय लोगों का मानना है कि, भीषण गर्मी के दौरान बारिश शुरू होने से एक हफ्ते पहले ही मंदिर की छतों से पानी टपकना शुरू हो जाता है। जिस आकार की बूंदे छत से टपकती है, उसी आधार पर अच्छी या निम्न बारिश के संकेत मिलते हैं।

    स्थानीय कृषि से जुड़े लोगों का मानना है कि, मंदिर की छत पर पानी की बूंदे देखकर संकेत मिलता है कि, इस साल खेती सही रहेगी या खराब। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि, जैसे ही बारिश शुरू होती है, मंदिर की छत पूरी तरह से सूख जाती है।

    कानपुर बेहटा जगन्नाथ मंदिर

    मंदिर की छत

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    Source: 

    Government of Uttar Pradesh

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।