भगवान जगन्नाथ क्यों धारण करते हैं हाथी का रूप? जानिए गजानन वेश से जुड़ी पौराणिक कथा
पुरी के जगन्नाथ धाम में देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को गज वेश में सजाया जाता है। यह परंपरा भक्तों की सच्ची श्रद्धा और ईश्वर ...और पढ़ें

भगवान जगन्नाथ के गज वेश के रूप का आध्यात्मिक महत्व (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली।भगवान जगन्नाथ जिन्हें कलयुग का देवता भी कहा जाता है। यूं तो भगवान जगन्नाथ से जुड़ी कई ऐसी परंपराएं हैं, जो जितनी अनोखी है, उतनी ही आध्यात्मिकता से भरी हुई भी। इन्हीं परंपराओं में से एक परंपरा गेज वेश (हाथी का रूप), जिसे गजानन वेश भी कहा जाता है।
उड़ीसा के पुरी जगन्नाथ धाम में यह परंपरा हर साल देव स्नान पूर्णिमा के मौके पर निभाई जाती है, जिसके दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी के जगन्नाथ धाम पहुंचते हैं।
गज वेश क्या है?
हर साल स्नान पूर्णिमा के मौके पर भगवान जगन्नाथ समेत भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को मंदिर के स्नान मंडप पर विराजमान किया जाता है, जहां मंदिर के पुजारी 108 पानी के भरे हुए कलशों से उनका महाभिषेक स्नान करते हैं।
स्नान के पश्चात भगवान जगन्नाथ और भाई बलभद्र को हाथी के रूप में सजाया जाता है, जबकि बहन सुभद्र का श्रृंगार कमल रूप में किया जाता है। इसी खास अलंकरण को गज वेश कहा जाता है।
गज वेश से जुड़ी पौराणिक कथा?
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, 15वीं शताब्दी में गणपति भट्ट नाम का एक विद्वान जो भगवान गणेश को ही मानता था और उनका परम भक्त भी था, जगन्नाथ धाम पुरी पहुचें। वे स्नान यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए आए, लेकिन उन्हें भगवान गणेश के प्रिय गजानन रूप के दर्शन नहीं हुए, जिससे वे निराश होकर पुरी छोड़ने का इरादा कर चुके थे।
भगवान जगन्नाथ के बारे में कहा जाता है कि, वे कभी भी अपने भक्तों को निराश नहीं करते हैं,बल्कि हमेशा उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने यह संदेश देने का इरादा किया कि, ईश्वर अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा के अनुरूप किसी भी रूप में उन्हें दर्शन दे सकते हैं।
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जब अगली सुबह भगवान गणेश को मानने वाले गणपति भट्ट जगन्नाथ धाम में दर्शन के लिए पहुंचे, तो वे हैरान रह गए। भगवान जगन्नाथ उन्हें काले गजानन स्वरूप में दिखाई दिए, जबकि भगवान बलभद्र सफेद हाथी के रूप में और बहन सुभद्रा दिव्य कमल पर विराजमान थीं। इस अद्भुत दर्शन के बाद गणपति भट्ट को एहसास हुआ कि, परमात्मा एक ही हैं, वे अपने भक्तों की सच्ची भक्ति के अनुरूप किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं।
भगवान जगन्नाथ के गज वेश का महत्व
गज वेश महज धार्मिक परंपरा का ही हिस्सा नहीं, बल्कि सनातन धर्म में उस भावना का प्रतीक है, जो यह दर्शाती है कि, ईश्वर एक ही, लेकिन उन्हें पूजा कई रूपों में जाता है।
यह परंपरा इस बात की भी साक्षी है कि, भगवान बाहरी रूप-रंग नहीं, बल्कि भक्त की निश्चल श्रद्धा और प्रेम को स्वीकार करते हैं। इसी वजह से भगवान जगन्नाथ को भक्तवत्सल भी कहा जाता है, यानी ऐसे भगवान जो अपने भक्तों की सच्ची भावनाओं का हमेशा सम्मान करते हैं।

पुरी के जगन्नाथ धाम में आज भी यह सदियों पुरानी परंपरा निभाई जाती है। इस दु्र्लभ स्वरूप के दिव्य दर्शन को काफी शुभ माना जाता है और हर साल हजारों-लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस दिव्य दर्शन के लिए पुरी आते हैं। गज वेश आज भी भक्तों के बीच अटूट आस्था, ईश्वर के प्रति करुणा और भक्त-भगवान के गहरे संबंधों का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
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