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भारत के वो प्रसिद्ध मंदिर जहां 'पैसा' चढ़ाना सख्त मना है, नहीं मिलेगी एक भी दानपेटी

Published: Thu, 25 Jun 2026 04:00 PM (IST)

भारत में कई ऐसे अनोखे मंदिर हैं जहां भक्त अपनी श्रद्धा से दान करते हैं, लेकिन कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां पैसों का दान स्वीकार नहीं किया जाता है।

भारत के इन मंदिरों में चढ़ावा नहीं चढ़ता है। (Picture Credit- AI Generated)

भारत के इन मंदिरों में चढ़ावा नहीं चढ़ता है। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत के तकरीबन हर मंदिर में दानपेटी रखी होती है, जहां भक्त अपनी स्वेच्छा और समर्थ से रुपए-पैसे, गहने-आभूषण और तरह-तरह के कीमती चढ़ावे देकर अपनी अटूट श्रद्धा और विश्वास को मजबूत करते हैं।

भगवान तिरुपति बालाजी समेत देशभर के कुछ ऐसे मंदिर हैं जहां सालाना करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। लेकिन देशभर में कुछ ऐसे भी मंदिर हैं, जहां धन का दान करना पूरी तरह से मना है।

यह सुनने में थोड़ा हैरान कर सकता है, लेकिन यह सच है आइए जानते हैं कौन-से हैं वो मंदिर जहां न दानपेटी है और न ही पैसों को स्वीकार किया जाता है।

जलाराम बापा मंदिर

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जलाराम बापा मंदिर

गुजरात के अहमदाबाद के राजकोट से करीब 52 किलोमीटर दूर वीरपुर स्थित जलाराम बापा मंदिर में दान नहीं लिया जाता है। इस मंदिर में यह परंपरा साल 2000 से शुरू हुई थी। जलाराम बापा के परिवार से जुड़े लोग बताते हैं कि, हम सिर्फ लोगों को सच्चे मन से और ईमानदारी से भोजन कराने की इच्छा रखते हैं।

मंदिर में दान स्वीकार न करने के पीछे बेहद ही सामान्य कारण हैं। अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से भी दान देने की इच्छा जाहिर करता है, तो हम कहते हैं कि, किसी जरूरतमंद को दान करें। हम चाहते हैं कि, लोग यहां श्रद्धा से आए, दर्शन कर प्रसाद ग्रहण करें।

श्री प्रकाशेश्वर महादेव मंदिर

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श्री प्रकाशेश्वर महादेव मंदिर

उत्तराखंड राज्य में स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध श्री प्रकाशेश्वर महादेव मंदिर उन मंदिरों में शामिल है, जहां किसी भी तरह का भेंट, चढ़ावा या दान स्वीकार नहीं किया जाता है। यहां तक कि गुप्त दान भी नहीं लिया जाता है। मंदिर के ऊपर बड़े अक्षरों में साफ-साफ लिखा है कि, मंदिर में पैसा चढ़ाना सख्त माना है।

श्री प्रकाशेश्वर महादेव मंदिर  हरिद्वार के गुरुजी शिवदास जी ने स्थापित किया है।

भगवान वेंकटेश्वर बालाजी का मंदिर

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भगवान वेंकटेश्वर बालाजी का मंदिर

आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में भगवान वेंकटेश्वर बालाजी का एक ऐसा मंदिर है, जहां पर दान-दक्षिणा नहीं दिया जाता है। इस मंदिर में भी कोई दानपेटी नहीं है। मंदिर करीब 5 हजार साल पुराना बताया जाता है, जो हैदराबाद के उस्मान झील के नजदीक स्थित है, जिसे चिलकुर बालाजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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