शालिग्राम से मुरलीधर बने ठाकुरजी: वृंदावन का वो मंदिर, जिसकी रसोई में 500 साल से नहीं बुझी आग!
वृंदावन में स्थित श्री राधा रमण मंदिर की स्थापना 1542 में गोपाल भट्ट गोस्वामी ने की थी और यह वृंदावन के सात प्रमुख मंदिरों में से एक है। ...और पढ़ें
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वृंदावन का राधारमण मंदिर और उससे जुड़ा रहस्य (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित है श्री राधा रमन जी का मंदिर जो भगवान श्रीकृष्ण के राधा रमन रूप को समर्पित है। यह मंदिर 1542 ईस्वी में गोपाल भट्ट गोस्वामी के द्वारा बनाया गया था। श्रीराधा रमन मंदिर, श्री राधा वल्लभ जी, श्री गोविंद देव जी और 4 अन्य समेत वृंदावन के ठाकुरजी के 7 मंदिरों में से एक है। यह मंदिर वृंदावन के सबसे सम्मानित मंदिरों में से एक है। इसमें राधा रानी के साथ कृष्ण मूल शालिग्राम देवता के रूप में वास करते हैं।
श्री राधारण जी का मंदिर श्री गौड़ीय समाज के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है। बताया जाता है कि, अन्य विग्रह तो वृंदावन छोड़कर जयपुर चलें गए थे, लेकिन एकमात्र श्री राधारमण जी कभी भी वृंदावन धाम छोड़कर नहीं गए और साल 1542 से यहीं पर विराजमान है। मंदिर के दक्षिण हिस्से में श्री राधा रमण जी का प्राकट्य स्थल और गोपाल भट्ट गोस्वामी जी का समाधि स्थल है। माना जाता है कि, गोपाल भट्ट गोस्वामी जी ने ही राधारमण के विग्रह को प्रकट किया था।
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श्री राधारमण जी का प्रकट किसी चमत्कार से कम नहीं
एक बार गोपाल भट्ट गोस्वामी जी यात्रा के दौरान गण्डकी नदी में नहा कर सूर्य भगवान को अर्घ्य दे रहे थे, तभी उनके हथेली में शालिग्राम भगवान का एक अद्भुत शिला उनके हाथ में आ गया। इसी तरह 12 बार डुबकी लगाने पर 12 शालिग्राम जी शिला उनके हाथ में आई। इसके बाद गोपाल भट्ट स्वामी जी उन सभी शिलाओं को लेकर वृंदावन आ गए। उन्होंने उन सभी शिलाओं को यमुना नदी के केशी घाट तट पर एक कुटी बनाकर शिलाओं को विराजित कर सच्ची श्रद्धा भाव के साथ पूजा अर्चना शुरू कर दी।
एक बार वृंदावन की यात्रा पर निकले हुए सेठ जी ने वृंदावन में स्थित उन सभी विग्रहों के लिए अलग-अलग तरह के महंगे कपड़े और आभूषण दिए। उन्होंने वस्त्र और आभूषण श्री गोपाल भट्ट जी को भेंट कर दिए। लेकिन जब उन्होंने शालिग्राम की तरफ देखा तो वो सोचने लगे कि, श्री शालिग्राम जी को कपड़े कैसे धारण कराए। श्री गोस्वामी भट्ट जी सोचने लगे अगर मेरे भगवान भी अन्य भगवान की तरह होते, तो मैं उन्हें नए-नए वस्त्र पहनाने के साथ अलग-अलग तरह के आभूषणों से सजाता और उनको झूले में बिठाकर झूला झुलाता।
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इस ख्याल में डूबे-डूबे पूरी रात बीत गई लेकिन उन्हें नींद नहीं आई। सुबह जब थोड़ी आंख लगी तो उठने के बाद उन्होंने जो देखा उसे देखकर वो काफी हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि, शालिग्राम साक्षात मुरलीधर श्याम जी के रूप में बैठे हुए हैं। जिस दिन यह घटना घटित हुई वो दिन 1599 विक्रम संवत वैशाख शुक्ल पूर्णिमा का शुभ दिन था।
गोपाल भट्ट स्वामी श्रीशालिग्राम का बदला रूप देखकर तुरंत उठे उन्होंने अपने भगवान का विशेष श्रृंगार किया और उनकी सेवा की। उसके बाद गोपाल भट्ट गोस्वामी जी ने अपने सभी बड़े और गुरुजनों को बुलाया और राधारमण जी के प्राकट्य उत्सव को श्रद्धा भाव के साथ मनाया।
भगवान राधारमण जी गोस्वामी जी के निवास के नजदीक एक पीपल के पेड़ के नीचे प्रकट हुए थे। यह वही दिव्य स्थान है, जहां आज से करीब 4500 साल पहले भगवान श्री कृष्ण एक रास के दौरान श्री राधा जी से समाधि ले लिए थे। लेकिन गोपाल भट्ट गोस्वामी के कहने पर एक बार फिर से उसी स्थान पर विग्रह के रूप में प्रकट हुए। कहा जाता है कि, जब भगवान श्रीकृष्ण उस जगह से अलग हुए थे तो राधा जी ने उन्हें रमन के नाम से पुकारा और फिर उनको सभी लोग राधा के रमन के नाम से जानने लगे तो इस तरह गोपाल भट्ट गोस्वामी जी ने उनका नाम राधारमण रख दिया।

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राधारमण जी का अद्भुत विग्रह
राधारमण जी का विग्रह केवल द्वादश अंगुल का है, लेकिन इनका दर्शन इतना निराला और मनमोहक है कि जिसे देखने के बाद हर को राधा रमण प्रेमी हो जाता है।
वृंदावन में स्थित प्राचीन विग्रहों को पहले गोविंद, मदनमोहन और गोपीनाथ जैसे कई नामों से पुकारा जाता था, लेकिन बाद में श्री राधा रानी जी के विग्रह को उन सभी मंदिरों में स्थापित किया गया तो उनका नाम बदल कर गोविंद, राधा गोपीनाथ और राधा मदनमोहन रख दिया गयाय़
राधा रमण जी के विग्रह से जुड़ी खास बात
राधा रमण जी के बारे में दिलचस्प बात यह है कि, इनका विग्रह इन्हीं के 3 अन्य विग्रहों से मिलकर बना हुआ रूप है।
- इनका मुखर विंद गोविंद देव की तरह है।
- वक्ष स्थल (छाती वाला हिस्सा) गोपीनाथ की तरह है।
- वही इनके चरण कमल मदनमोहन की तरह है।
कहा जाता है किस इनके दर्शन मात्र से ही तीनों विग्रहों के दर्शन पूर्ण हो जाते हैं और इनके अकेले दर्शन से तीन ठाकुर जी के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है।
मंदिर की रसोई घर से जुड़ा रहस्य
श्रीराधा रमण मंदिर वृंदावन के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों में से है। इस मंदिर से जुड़ा एक रहस्य यह भी है कि, मंदिर के रसोईघर में 500 सालों से भी ज्यादा पहले से लगातार आग जल रही है और ये वही आग है, जो मंदिर के निर्माण के समय जलाया गया था। मंदिर में लगने वाले भोग को इसी आग में पकाया जाता है, जो कि ठाकुर जी को भी लगाया जाता है।
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