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    भारत का एक ऐसा अनोखा मंदिर, जहां एक ही मूर्ति में दिखते हैं आधे गणेश और आधे हनुमान

    Updated: Wed, 24 Jun 2026 03:07 PM (IST)

    तमिलनाडु के दक्षिण चेन्नई में स्थित मध्य कैलाश मंदिर में आद्यंत प्रभु की अनोखी प्रतिमा है, जो आधे गणेश और आधे हनुमान का स्वरूप है। ...और पढ़ें

    चेन्नई मे आद्यंत प्रभु का मंदिर (Picture Credit- AI Generated)

    चेन्नई मे आद्यंत प्रभु का मंदिर (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हम सभी ने भगवान शिव और माता पार्वती के अर्धनारीश्वर स्वरूप के बारे में पढ़ा, सुना और देखा जरूर होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं भारत में एक ऐसा भी मंदिर है, जहां आधे गणेश और आधे भगवान हनुमान विराजते हैं।

    चौकिए मत तमिलनाडु के नादुक्कयिलाई के नाम से प्रसिद्ध मध्य कैलाश मंदिर जो दक्षिण चेन्नई में स्थित हिंदू मंदिर है।

    मध्य कैलाश मंदिर में आधे गणेश और आधे हनुमान की मूर्ति

    मध्य कैलाश मंदिर अपनी अनोखी प्रतिमा आधे गणेश और आधे हनुमान जी को मूर्ति के लिए काफी फेमस है। मंदिर में स्थापित इस मूर्ति को आद्यंत प्रभु (Lord Adhyantha Prabhu) के नाम से जाना जाता है। जो भगवान गणेश और हनुमान जी के रूप में विलीन है।

    जहां दाहिने ओर गणेश हैं, तो वही बाईं ओर हनुमान जी की मूर्ति है। मंदिर में स्थापित आद्यंत प्रभु का कुंभाभिषेकम साल 1994 में पूरा हुआ। तब से लेकर आज तक दुनिया भर से लोग आद्यंत प्रभु की अद्भुत और अनोखी प्रतिमा को देखने के लिए मध्य कैलाश मंदिर आते हैं।

    Lord Aadhyanta Prabhu

    आद्यंत प्रभु (Ai Image)

    मध्य कैलाश मंदिर से जुड़ा रोचक तथ्य

    मंदिर से जुड़े पुजारी बताते हैं कि, मंदिर के ही एक अधिकारी को इस रूप के दर्शन हुए थे, जिसके बाद इस प्रतिमा की रचना की गई थी। आद्यंत प्रभु की आरती करने के लिए कपूर जलाया जाता है। इसके बाद हर दोपहर को पुजारी मूर्ति का स्नान करते हैं और गीले कपड़ों में ही अनुष्ठान शुरू कर देते हैं।

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    आद्यंत प्रभु के नाम का मतलब

    आद्यंत प्रभु के नाम का मतलब है कि, जिनका न उद्गम है और न ही कोई अंत। हिंदू शास्त्रों और पुराणों में हनुमान जी को चिरंजीवी बताया गया है, जबकि भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश जी का भी जन्म दो बार हुआ था। इस अनोखे मंदिर में आधे गणेश और आधे हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है, जिन्हें रुद्र का रूप भी कहा जाता है।

    मंदिर के मुख्य देवता के रूप में वेंकट आनंद विनायकर, भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान सूर्य का भी मंदिर है, जो भक्तों के लिए अत्यंत खास महत्व रखता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।