10 महीने पानी के अंदर, फिर अचानक बाहर आता है महाभारत कालीन यह मंदिर; देखकर वैज्ञानिक भी हैरान!
महाराष्ट्र के पुणे में भाटघर बांध के बैकवाटर में एक प्राचीन कंबेश्वर शिव मंदिर है, जो महाभारत काल का माना जाता है। इस मंदिर का रहस्य जानकर उड़ जाएंगे ...और पढ़ें

10 महीने पानी में रहने वाला पांडवकालीन मंदिर (Picture Credit AI- Generated Image)
HighLights
भाटघर बांध में छिपा महाभारत काल का कंबेश्वर मंदिर।
साल के 10 महीने पानी में डूबा रहता है यह मंदिर।
मई के अंत में ही दर्शन देते हैं अद्भुत शिवलिंग।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जिसके किस्से और रहस्य ऐसे हैं, जिनके जवाब साइंस के पास भी नहीं है। ऐसे ही रहस्यों से भरा एक मंदिर हैं, महाराष्ट्र के पुणे जिले के भोर तहसील में भाटघर बांध के बैकवाटर में स्थित एक प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि, जब भाटघर बांध का वाटर लेवल मात्र 6 प्रतिशत रहता है, तब महाभारत काल का माना जाने वाला एक प्राचीन मंदिर बांध के पानी में डूबे रहने के बाद सतह पर दिखाई देता है। अपनी अप्रतिम पत्थर की वास्तुकला औरे पानी के नीचे स्थित शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध ऐतिहासिक कंबेश्वर मंदिर ने स्थानीय लोगों और इतिहासकारों के बीच काफी रुचि जगाई है।
साल के 10 महीने मंदिर पानी के अंदर
स्थानीय लोगों का मानना है कि, यह मंदिर पांडव काल से जुड़ा है। साल के 12 महीनों में से करीब 10 महीने यह मंदिर पूरी तरह से पानी में डूबा रहता है। लेकिन हर साल मई के आखिर में जब बांध का पानी कम होने लगता है, तो मंदिर अपनी पूरी भव्यता सबके सामने प्रकट करता है।
सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि, कंबरेश्वर मंदिर का गर्भगृह हमेशा घुटनों तक पानी से भरा रहता है। मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग, देवी पार्वती की भव्य प्रतिमा और उनके सामने बैठे नंदी महाराज की प्रतिमा स्थापित है। भक्त भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए अपने हाथ पानी में डुबोकर मंदिर की मूर्तियों को स्पर्श करते हैं।
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मंदिर की वास्तुकला आधुनिक इंजीनियर भी हैरान
इस सदियों पुराने मंदिर की वास्तुकला आज के आधुनिक इंजीनियरों को भी हैरान कर देती है। मंदिर का शिखर और ऊपरी भाग चूना पत्थर, रेत और पकी हुई ईंटों से बनी है, जबकि इसकी मजबूत दीवारें भारी पत्थरों से बनाई गई हैं। मंदिर के ठीक सामने प्राचीन चट्टानें और वीरगल भी देखने को मिल सकते हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को और भी बढ़ा देते हैं।
दशकों तक पानी में डूबे रहने के बाद भी मंदिर आज भी मजबूती से खड़ा है। बांध के उफान से कुछ नुकसान तो हुई है, लेकिन इसकी नींव और मुख्य संरचना सदियों से पहले की तरह ही मजबूत बनी हुई है।
प्रकृति और इतिहास का यह अनोखा संगम केवल मई के आखिर कुछ दिनों में ही देखने को मिलता है। मानसून आते ही और भाटघर बांध पानी भरते ही कंबरेश्वर मंदिर अगले 10 महीनों के लिए फिर से पानी में पूरी तरह डूब जाता है।
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