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    कामाख्या मंदिर में साल के 3 दिन क्यों नहीं होती पूजा-पाठ? पढ़ें अंबुबाची मेले से जुड़ा ये खास नियम

    Updated: Thu, 04 Jun 2026 10:00 AM (IST)

    भारत के रहस्यमयी कामाख्या मंदिर में देवी सती के योनि भाग की पूजा होती है, जो 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां हर साल अंबुबाची मेला लगता है, जिसके दौरा ...और पढ़ें

    अंबुबाची मेले में क्यों बंद रहते हैं 3 दिन कपाट (Picture Credit- AI Generated)

    अंबुबाची मेले में क्यों बंद रहते हैं 3 दिन कपाट (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत अपनी संस्कृति और कलाओं के साथ-साथ अपनी आध्यात्म और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। खासकर हिंदू धर्म में आस्था से जुड़े कई चमत्कार देखने को मिलते हैं। यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपना रहस्यों के लए जाने जाते हैं।

    पूर्वोत्तर भारत के असम में स्थित मां कामाख्या देवी का दरबार भी एक ऐसी ही दिव्य और चमत्कारी जगह है, जिसका रहस्य आज भी लोगों को हैरान कर देता है। यहां हर साल जून के महीने में आस्था, अध्यात्म और रहस्य का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता है, जिसे दुनिया 'अंबुबाची मेला' कहा जाता है। आइए जानते हैं इस साल कब से शुरू होगा ये मेला और क्या है इस मेले की खासियत- 

    रहस्यों से भरा मां कामाख्या का दरबार

    मां कामाख्या का यह पावन धाम असम के गुवाहाटी शहर की नीलाचल पहाड़ियों पर मौजूद है। हिंदू धर्म की सभी 51 शक्तिपीठों में कामाख्या मंदिर का स्थान बेहद खास और सर्वोच्च माना गया है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बाकी मंदिरों की तरह किसी देवी की मूर्ति मौजूद नहीं है। 

    जी हां, मूर्ति की जगह यहां एक प्राकृतिक रूप से निर्मित शिला की पूजा की जाती है, जिसका आकार एक योनि के समान है। ऐसा माना जाता है देवी सती का योनि भाग यहां पर गिरा था, जिसके बाद यह शक्तिपीठ बना। 

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    कब से शुरू होगा अंबुबाची मेले?

    अंबुबाची मेला यहां होने वाला एक बड़ा और अहम पर्व है। इस मेले से बहुत ही प्राचीन और गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। ऐसा माना जाता है कि इस वार्षिक मेले के दौरान मां कामाख्या अपने मासिक धर्म यानी रजस्वला से गुजरती हैं। यही कारण है कि इस दौरान देवी मां को पूरा आराम दिया जाता है और मंदिर के मुख्य कपाट तीन दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए जाते हैं। 

    इन तीन दिनों में मंदिर परिसर में किसी तरह की कोई पूजा-अर्चना, आरती या अन्य कोई भी धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते। चौथे दिन, खास शुद्धिकरण अनुष्ठान करने के बादमंदिर के पट भक्तों के लिए खोले जाते हैं। इस साल अंबुबाची मेले की शुरुआत 22 जून से होने जा रही है, जो 26 जून तक चलेगा।

    इस मेले से जुड़ी कई सारी मान्यताएं हैं। माना जाता है कि मंदिर का पट बंद करते समय यहां एक सफेद कपड़ा रखा जाता है, जो 3 दिन बाद मंदिर खुलने पर पूरे लाल रंग का हो जाता है। भक्तों को प्रसाद के रूप में यही 'अंगवस्त्र' यानी लाल कपड़े का एक टुकड़ा दिया जाता है, जिसे लोग मां का परम आशीर्वाद मानते हैं।

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