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    देवी के 51 शक्तिपीठों में सबसे खास है कामाख्या मंदिर, इस नवरात्र जरूर बनाएं मां के दर्शन का प्लान

    Updated: Sun, 22 Mar 2026 02:13 PM (IST)

    कामाख्या देवी मंदिर के 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर के पास 10 महाविद्याओं का मंदिर भी है। ...और पढ़ें

    जानें कामाख्या देवी मंदिर का रहस्य (Picture Courtesy: Incredible India)

    जानें कामाख्या देवी मंदिर का रहस्य (Picture Courtesy: Incredible India)

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    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम की राजधानी गुवाहटी में नीलांचल पहाड़ियों पर स्थित मां कामाख्या देवी मंदिर एक धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ अध्यात्म और तंत्र विद्या का भी बड़ा केंद्र है। यह मंदिर देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

    चैत्र नवरात्र के इस पावन अवसर पर आइए जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें और दर्शन के लिए आप इस मंदिर तक कैसे पहुंच सकते हैं। 

    16वीं शताब्दी में हुआ मंदिर का निर्माण

    कामाख्या मंदिर का वर्तमान स्वरूप 16वीं शताब्दी की वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां माता की कोई मूर्ति नहीं है। मंदिर के गर्भगृह में एक प्राकृतिक जलधारा के बीच योनि के आकार का एक शिलाखंड है, जिसे माता का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। मंदिर के गुंबदों पर की गई नक्काशी और पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियां इस मंदिर को भारत के सबसे खूबसूरत मंदिरों में से एक बनाती है। 

    Kamakhya Devi Temple

    (Picture Courtesy: Instagram)

    देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने शिव के मोह को भंग करने के लिए माता सती के पार्थिव शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से काटा था, तब उनके शरीर के अंग 51 स्थानों पर गिरे। मान्यता है कि नीलांचल पर्वत पर माता सती की योनि गिरी थी, इसी कारण यह स्थान स्त्री शक्ति और प्रजनन क्षमता का प्रतीक माना जाता है।

    अम्बुबाची मेला और रक्त का रहस्य

    इस मंदिर से जुड़ी सबसे विशेष मान्यता अम्बुबाची मेले के दौरान देखने को मिलती है। कहा जाता है कि जून के महीने में माता रजस्वला होती हैं। इसलिए इस दौरान तीन दिनों के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। साथ ही, पास से बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है। चौथे दिन भक्तों को प्रसाद के रूप में अम्बुबाची वस्त्र दिया जाता है, जिसे बेहद शुभ और चमत्कारी माना जाता है।

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    तंत्र साधना का केंद्र

    कामाख्या मंदिर को तंत्र विद्या का गढ़ कहा जाता है। यहां अघोरी, साधु और तांत्रिक अपनी सिद्धियों के लिए आते हैं। मान्यता है कि यहां की गई पूजा से शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। 

    दस महाविद्याओं के भी करें दर्शन

    मां कामाख्या के मंदिर के साथ-साथ यहां दस महाविद्याओं के मंदिर भी हैं। त्रिपुर सुंदरी, काली, तारा, भुवनेश्वरी, बग्लामुखी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धुमावती, मातंगी और कमला दस महाविद्याएं हैं। यहां महादेव के भी पांच मंदिर हैं।

    Ma kali

    (Picture Courtesy: www.maakamakhya.org)

    कामाख्या देवी मंदिर कैसे पहुंचें? 

    गुवाहाटी उत्तर-पूर्व का प्रवेश द्वार है, इसलिए यहां पहुंचना काफी आसान है-

    • हवाई मार्ग- सबसे नजदीकी हवाई अड्डा लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो मंदिर से लगभग 20 किमी दूर है। यहां से आप टैक्सी या बस ले सकते हैं।
    • रेल मार्ग- सबसे पास का रेलवे स्टेशन कामाख्या जंक्शन है, लेकिन गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से बेहतर कनेक्टिविटी मिलती है। स्टेशन से मंदिर तक जाने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा और बसें उपलब्ध हैं।
    • सड़क मार्ग- गुवाहाटी शहर सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आप निजी वाहन या सरकारी बसों के जरिए सीधे मंदिर परिसर तक जा सकते हैं।

    दर्शन के लिए कुछ जरूरी टिप्स

    • समय- कपाट सुबह 8 बजे से सूर्यास्त तक खुलते हैं। साथ ही, दोपहर को माता के विश्राम के लिए पट बंद किए जाते हैं।
    • भीड़- खास त्योहारों पर दर्शन में 5-10 घंटे का समय लग सकता है, इसलिए वीआईपी पास या जल्दी पहुंचने की सलाह दी जाती है।
    • पहनावा- मंदिर में पारंपरिक और शालीन कपड़े पहनकर जाएं।