MP के इस मंदिर में भक्तों की हर पुकार सुनती हैं मां विजयासन देवी, नवरात्र में बनाएं दर्शन का प्लान
विंध्याचल पर्वत पर स्थित यह धाम, भक्तों की हर मुराद पूरी करता है। बता दें, यहीं देवी पार्वती ने रक्तबीज का वध किया था। ...और पढ़ें

विंध्याचल की चोटी पर स्थित है मां विजयासन देवी का दिव्य धाम (Image Source: Instagram)
HighLights
सलकनपुर में मां विजयासन देवी का चमत्कारिक मंदिर
इसी स्थान पर देवी पार्वती ने किया था रक्तबीज का वध
रोप-वे से पहुंचें, सीहोर के पर्यटन स्थल भी देखें
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से महज 80 किलोमीटर दूर एक ऐसा चमत्कारिक मंदिर है, जहां भक्तों की हर पुकार सुनी जाती है? यह है सलकनपुर स्थित मां विजयासन देवी का मंदिर।
विंध्याचल पर्वत श्रृंखला पर 1000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस दिव्य दरबार में, खासकर शारदीय नवरात्र के समय, देश भर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए खिंचे चले आते हैं।

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रक्तबीज का वध और 'विजयासन धाम' का रहस्य
मान्यताओं के अनुसार, जब देवता 'रक्तबीज' नामक भयंकर राक्षस के अत्याचारों से त्रस्त हो गए थे, तब देवी पार्वती ने विकराल रूप धारण करके इसी स्थान पर उसका अंत किया था। इस महाविजय के बाद देवताओं ने देवी को जो आसन प्रदान किया, उसी के कारण यह पवित्र स्थान 'विजयासन धाम' कहलाया। दुख दूर करने वाली मां विजयासन को बहुत से लोग अपनी कुलदेवी के रूप में भी पूजते हैं।
बंजारों ने करवाया था मंदिर का निर्माण
इस मंदिर के निर्माण की कहानी बेहद रोचक है। कहा जाता है कि करीब 300 वर्ष पहले पशुओं का व्यापार करने वाले कुछ बंजारे चारे और विश्राम के लिए इस स्थान पर रुके थे। अचानक उनके पशु कहीं गायब हो गए। खोजबीन के दौरान एक वृद्ध बंजारे को एक छोटी कन्या मिली। जब बंजारे ने अपनी परेशानी बताई, तो कन्या ने एक पत्थर फेंककर माता का स्थान बताया और वहां पूजा करने को कहा। बंजारों ने जैसे ही मां भगवती की पूजा-अर्चना की, उनके खोए हुए पशु चमत्कारिक रूप से मिल गए। अपनी मन्नत पूरी होने की खुशी में उन बंजारों ने ही इस मंदिर का निर्माण करवाया था।

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मिनटों में तय होगा 1400 सीढ़ियों वाला सफर
पहाड़ी के शिखर पर विराजमान माता के दर्शन के लिए भक्तों को 1400 सीढ़ियों का सफर तय करना पड़ता है। हालांकि, अब सफर को आसान बनाने के लिए यहां पक्की सड़क का निर्माण भी कर दिया गया है। इसके अलावा, सबसे सुविधाजनक विकल्प 'रोप-वे' का है, जिसकी मदद से आप बिना थके मिनटों में माता के दरबार तक पहुंच सकते हैं।
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दर्शन के साथ सीहोर के इन प्रमुख पर्यटन स्थलों की भी करें सैर
अगर आप सलकनपुर आ रहे हैं, तो जिले के अन्य प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक स्थानों पर भी जा सकते हैं:
- सिद्ध गणेश मंदिर: गोपालपुर गांव (सीहोर जिला मुख्यालय से 3 किमी दूर) में स्थित यह मंदिर राजा विक्रमादित्य के समय का माना जाता है। बाद में मराठा पेशवा बाजीराव ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था। बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन यहां भारी भीड़ उमड़ती है।
- सरू मारू की गुफाएं: बुदनी तहसील के पान गुराड़िया गांव के पास यह एक प्राचीन बौद्ध पुरातात्विक स्थल है। यहां सम्राट अशोक के शिलालेख मौजूद हैं, जिनमें उनके और उनके पुत्र महेंद्र कुमार की यात्रा का जिक्र है।
- अन्य ऐतिहासिक स्थल: सीहोर शहर से 2 किमी दूर कुंवर चैन सिंह की समाधि स्थित है। इसके अलावा 1838 में बना 'ऑल सेंट चर्च' ब्रिटिश स्कॉटलैंड के चर्च की एक खूबसूरत प्रतिकृति है।
पर्यटन विकास और यातायात सुविधा
इस पूरे क्षेत्र की ऐतिहासिक और प्राकृतिक संपत्तियों को सहेजने के लिए 'सीहोर पर्यटन परिषद' का गठन किया गया है। सीहोर शहर भोपाल-रतलाम रेलवे मार्ग और भोपाल-इंदौर हाईवे पर स्थित है। भोपाल से इसकी सड़क मार्ग की दूरी मात्र 35 किमी है। वहीं, दूर से आने वाले यात्री राज्य की राजधानी भोपाल के हवाई अड्डे का भी उपयोग कर सकते हैं।