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    नवरात्र में जा रहे हैं मैहर? दर्शन का समय से लेकर ठहरने तक, यहां है पूरी ट्रैवल गाइड

    Updated: Thu, 19 Mar 2026 07:52 PM (IST)

    नवरात्र में मैहर जाने की योजना बना रहे भक्तों के लिए यह एक विस्तृत यात्रा गाइड है। ...और पढ़ें

    मां शारदा मंदिर दर्शन, ठहरने और पहुंचने की पूरी जानकारी (Picture Credit- Instagram)

    मां शारदा मंदिर दर्शन, ठहरने और पहुंचने की पूरी जानकारी (Picture Credit- Instagram)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र के दौरान अक्सर लोग देवी मां के दरबार दर्शन करने पहुंचते हैं। अगर आप भी इस बार माता रानी के मंदिर जाने का सोच रहे हैं, तो मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थस्थल मैहर जा सकते हैं। यहां पहुंचने के लिए यह टूर गाइड आपके बहुत काम आने वाली है। 

    आज इस आर्टिकल में हम आपको तमसा नदी के किनारे त्रिकूट पर्वत पर बसी मां शारदा की इस पावन नगरी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी कैसे पहुंचें, कहां ठहरें और दर्शन का समय सबके बारे में बताएंगे।

    मैहर से जुड़ी मान्यताएं

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव सती का पार्थिव शरीर लेकर पूरी दुनिया में भटक रहे थे, तब इस जगह पर माता का 'हार' गिरा था। 'माई का हार' गिरने की वजह से ही इस जगह का नाम धीरे-धीरे 'मैहर' पड़ गया। यह 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

    आल्हा-ऊदल से भी है कनेक्शन 

    कहा जाता है कि चंदेल राजाओं के सेनापति आल्हा और ऊदल माता के परम भक्त थे। मान्यता है कि आल्हा अमर हैं और आज भी सबसे पहले वही माता की पूजा करते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान जब मंदिर पूरी तरह बंद था, तब भी सुबह कपाट खुलने पर अंदर ताजे फूल और प्रसाद चढ़े हुए मिले थे।

    दर्शन से जुड़े नियम और सुविधाएं

    मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको 1001 सीढ़ियां चढ़नी होंगी। गर्भगृह में आप करीब 3 फीट की दूरी से माता के दर्शन कर सकते हैं। बुजुर्गों और दिव्यांगों के मुख्य द्वार से व्हीलचेयर की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा, आप टिकट लेकर रोपवे के जरिए भी आसानी से ऊपर पहुंच सकते हैं।

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    मंदिर में क्या-क्या ले जा सकते हैं? 

    मंदिर के अंदर आप सिर्फ प्रसाद ले जा सकते हैं। अपना बाकी सामान (जैसे जूते, बैग आदि) नीचे बनी दुकानों पर सुरक्षित रख सकते हैं। यहां VIP दर्शन के लिए कोई अलग से शुल्क या आधिकारिक व्यवस्था नहीं है। सभी भक्त समान रूप से दर्शन करते हैं।

    मंदिर में दर्शन और आरती का समय

    दर्शन का समय: सुबह 5:30 से दोपहर 12:00 बजे तक और फिर दोपहर 2:00 से शाम 7:30 बजे तक। हालांकि, नवरात्र के दौरान समय में बदलाव हो सकता है। वहीं, दोपहर 12:00 से 1:00 बजे तक माता विश्राम करती हैं, इसलिए इस दौरान मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।

    किस समय होती है आरती

    • सुबह की आरती: 5:30 बजे
    • दोपहर की आरती: 12:00 बजे
    • शाम की आरती: 7:30 बजे

    मैहर कैसे पहुंचें?

    • यहां पहुंचने का सबसे आसान रास्ता ट्रेन से है: मैहर (स्टेशन कोड: MYR) खुद एक रेलवे स्टेशन है, जो कटनी और सतना के बीच आता है। नवरात्र के समय यहां से गुजरने वाली लगभग सभी ट्रेनों को स्टॉपेज दिया जाता है। स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब 6 किमी है, जहां से आपको आसानी से ऑटो मिल जाएंगे।
    • हवाई जहाज से: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जबलपुर (162 किमी) और प्रयागराज (215 किमी) हैं। रीवा में भी एक एयरपोर्ट बन रहा है, जिसके पूरा होने पर दूरी मात्र 62 किमी रह जाएगी।
    • सड़क मार्ग से: मैहर नेशनल हाईवे (NH-30) से जुड़ा है। अगर आप अपनी गाड़ी से आ रहे हैं, तो मंदिर से पहले पार्किंग की अच्छी व्यवस्था है। शहर में दो बस स्टैंड भी हैं, जहां से सतना और अन्य शहरों के लिए बसें मिलती हैं।

    ठहरने और खाने की व्यवस्था

    • होटल: मंदिर के 6 किलोमीटर के दायरे में रुकने के लिए कई अच्छे होटल और धर्मशालाएं मौजूद हैं।
    • खाना: मैहर एक पवित्र नगरी है, इसलिए यहां आपको शुद्ध शाकाहारी भोजन ही मिलेगा। कई रेस्टोरेंट ऐसे भी हैं, जो बिना प्याज-लहसुन का सात्विक भोजन परोसते हैं।

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