इस मंदिर में रहते हैं 25,000 चूहे, गलती से भी मर जाए एक... तो चढ़ाना पड़ता है सोने का चूहा!
बीकानेर का करणी माता मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहां 25 हजार से अधिक चूहे रहते हैं और उन्हें पवित्र माना जाता है।

करणी माता का मंदिर, राजस्थान बीकानेर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में हिंदू धर्म जितना प्राचीन है, उसकी जड़े उतनी ही गहरी हैं। जहां मनुष्य रूपी देवताओं को तो महत्व दिया ही जाता है, बल्कि तमाम जीवों का भी सम्मान किया जाता है। आज हम एक ऐसे मंदिर के बारे में आपको बताएंगे जहां चूहा सम्मान भगवान की ही तरह किया जाता है।
राजस्थान के बीकानेर में स्थित करणी माता मंदिर बीकानेर के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर मां करणी को समर्पित है, जिन्हें स्थानीय लोग देवी दुर्गा से जुड़ा अवतार मानते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि, मां करणी 14वीं शताब्दी में रहने वाली चारण जाति से जुड़ी एक हिंदू योद्धा संत थीं।
तपस्वी जीवन जीते हुए करणी माता को स्थानीय लोगों द्वारा काफी सम्मानजनक और आदरपूर्वक के साथ पूजा जाता है। मां करणी से जुड़े देशभर में कई मंदिर हैं, लेकिन बीकानेर से 30 किलोमीटर दूर स्थित देशनोक कस्बे में स्थित यह मंदिर सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।

मां करणी के मंदिर को क्या खास बनाता है?
आपको जानकार हैरानी होगी कि, बीकानेर में स्थित मां करणी का मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए नहीं, बल्कि 25 हजार से ज्यादा चूहों के रहने के लिए प्रसिद्ध है, जो मंदिर परिसर में बिना किसी डर के इधर-उधर घूमते रहते हैं। ये चूहे दीवारों और फर्श की दरारों से निकलते हुए आमतौर पर आने वाले भक्तों के पैरों के ऊपर से गुजर जाते हैं।
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि, मंदिर में रहने वाले चूहों के द्वारा कुतरे गए खाद्य पदार्थों को यह अशुद्ध या खराब नहीं माना जाता, बल्कि एक पवित्र प्रथा के रूप में देखा जाता है। भारत समेत दुनियाभर से लोग इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए आते हैं।
इसके अलावा भक्त इन चूहों के लिए दूध, मिठाई और तमाम-तरह के प्रसाद भी लाते हैं। इन 25 हजार चूहों में सबसे ज्यादा संख्या काले चूहों की है, लेकिन मंदिर में सफेद चूहों को देखना खासतौर से पवित्र माना जाता है, क्योंकि इन सफेद चूहों को मां करणी और उनके पुत्रों का अवतार बताया जाता है।
सोने से बना चूहा क्यों चढ़ता है?
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु मिठाई चढ़ाकर चूहों को आकर्षित करते हैं। हालांकि मंदिर में आने वाले भक्त इस बात का खास ध्यान रखते हैं कि, किसी चूहे को चोट पहुंचाना या मारना चाहे गलती से ही क्यों न हो एक गंभीर पाप की श्रेणी में आता है।
जिस भी व्यक्ति से किसी भी चूहे को हानि पहुंचती है, उसे मरे हुए चूहे की जगह मंदिर में सोने या चांदी का चूहा चढ़ाना होता है।
मां करणी से जुड़ी पौराणिक कथा
करणी माता से जुड़ी कई रोचक पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं। इन प्रचलित कहानियों में से एक सबसे चर्चित कहानी करणी माता के सौतेले पुत्र लक्ष्मण से जुड़ी है। एक दिन कोलायत तहसील के कपिल सरोवर से पानी पीने के दौरान लक्ष्मण उसमें डूब गया।
अपने सौतेले पुत्र के निधन से करणी माता ने मृत्यु के देवता यम से प्रार्थना की, जिन्होंने पहले तो मां करनी के पुत्र को जिंदा करने का अनुरोध पहले तो ठुकरा दिया। लेकिन उनके दुख और दृढ़ निश्चय से द्रवित होकर यम ने उनकी विनती स्वीकार क ली और न सिर्फ लक्ष्मण बल्कि करणी माता के सभी पुत्रों को चूहों के रूप में फिर से जीवित कर दिया।
-1782303563645.jpg)
AI Image
यह भी पढ़ें- भारत का एक ऐसा अनोखा मंदिर, जहां एक ही मूर्ति में दिखते हैं आधे गणेश और आधे हनुमान
यह भी पढ़ें- काली शक्तियों को बोतल में बंद करने वाली और मसान की देवी मां मेलडी कौन हैं? जानिए उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक कथा
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।