काली शक्तियों को बोतल में बंद करने वाली और मसान की देवी मां मेलडी कौन हैं? जानिए उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक कथा
मां मेलडी हिंदू धर्म की एक शक्तिशाली देवी हैं, जिनकी पूजा मुख्य रूप से गुजरात और महाराष्ट्र में होती है। आइए जानते हैं आखिर कौन हैं मां मेलडी और उनकी ...और पढ़ें

मेलडी माता एक शक्तिशाली और मसान की देवी (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म से जुड़ी अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली देवी, काली शक्तियों को बंधक बनाकर उनपर सवार रहने वाली मां मेलडी जो केवल रक्षा ही नहीं करती, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा से भी छुटकारा दिलाती हैं। भारत देश में मुख्य रूप से इनकी पूजा सौराष्ट्र यानी गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में की जाती है।
जहां गुजरात में इन्हें चुनवा दिया कोली के रूप में पूजा जाता है और कुछ लोग इन्हें खेतों की सुरक्षा से जुड़ी देवी भी मानते हैं। आखिर कौन हैं माता मेलडी जिनके बारे में अधिकतर लोगों को भी नहीं पाता है; जानते हैं मां मेलडी की उत्पत्ति से जुड़ा रहस्य और पौराणिक कथा?
माता मेलडी का रूप कैसा है?
मान्यताओं के मुताबिक, माता मेलडी के 8 हाथ हैं, जिनमें अलग तरह के हथियार हैं। जहां उनके एक हाथ में बोतल, दूसरे हाथ में खंजर, तीसरे हाथ में त्रिशूल, चौथे हाथ में तलवार, पांचवें हाथ में गदा, छठवें हाथ में चक्र, सातवें में कमल, आठवां हाथ अभय की मुद्रा में स्थित है।
माता मेलडी के हाथ में स्थित बोतल इस बात का प्रतीक हैं कि, ब्रह्मांड की समस्त तांत्रिक शक्तियां उसमें बंद हैं और मां का वाहन एक बकरी है।

मेलडी माता की उत्पत्ति कैसे हुई?
सतयुग काल समाप्ति के दौरान एक राक्षस था, जिसका नाम अमरूवा था। अमरूवा के अत्याचार से सभी देवता परेशान थे। सभी देवता मां जगत जननी से मदद मांगने आए। फिर मां दुर्गा समेत नव स्वरूपों ने एक साथ मिलकर अमरूवा के खिलाफ युद्ध शुरू किया। माना जाता है कि, यह युद्ध करीब 5000 सालों तक चला, उसके बाद मां दुर्गा ने उस दैत्य की संपूर्ण सेना का सर्वनाश कर दिया।
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जब दैत्य अमरूवा भी युद्ध में खुद को हारता हुआ पाया, तो मां दुर्गा से खुद की रक्षा के लिए वह एक गाय की खाल में जा छिपा। वह जानता था कि, यह देविया इस अशुद्ध और अपवित्र स्थान पर प्रवेश नहीं कर सकती हैं। फिर नव दुर्गा ने अपने हाथों को तेजी से रगड़ा उससे जो मैल निकलता उससे एक 5 साल की दिव्य कन्या की उत्पत्ति हुई, जिसके हाथों में खंजर था।
मां दुर्गा ने उस कन्या से कहा कि, आप इस मृत गाय की खाल में प्रवेश कर उस दैत्य अमरूवा का अंत करें। मां की आज्ञा पाकर माता अमरूवा ने गाय की खाल में प्रवेश किया। मां मेलडी के रौद्र अवतार को देखकर दैत्य ने भागकर सायला सरोवर में किड़ा बनकर जा छुपा फिर माता मेलडी ने वही पर उस दैत्य का अंत कर दिया।
दैत्य अमरूवा का अंत करने के बाद जब माता मेलडी मां दुर्गा के पास पहुंची तो, उन्होंने पूछा कि, हे मां मैं कौन हूं, मेरा नाम क्या है, मेरे धाम का क्या नाम है? इस पर मां दुर्गा ने उन्हें देवी चामुंडा के पास भेजा। तब मां चामुंडा ने उस कन्या का नाम, धाम बताने से पूर्व उनकी परीक्षा लेनी चाहिए और कहा कि, पहले आप कामरूप कामाख्या होकर आओ।
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उस कन्या ने कामरूप कामाख्या में जाकर वहां तंत्र-मंत्र से जुड़ी सुरक्षा को तोड़ा फिर वहा का पहरेदार नूरीया मसान को बंधक बना लिया। उसके बाद माता मेलडी ने आसपास जितने भी भूत-प्रेत, तांत्रिक और बुरी शक्तियां थी, उन्हें बोतल में कैद कर लिया और उन्हीं में से कुछ काली शक्तियों को बकरा बनाकर मां मेलडी सवार होकर माता चामुंडा के पास जा पहुंचीं। यह देखकर मां चामुंडा काफी खुश हुई।
मेलडी नाम पड़ने की वजह?
मेलडी का मतलब है कि, जो मैल से उत्पन्न हुई है, और दूसरा नाम जिसने मलिन मैली शक्तियों पर जीत हासिल कर ली वह मेलडी माता है। देवी माताओं के हाथ के मैल से उत्पन्न हुई इसी वजह से माता चंडी जी ने इनका नाम मेलडी रखा।
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