मां धूमावती जयंती 2026: कौए की सवारी और खुला बाल, जानें मां धूमावती का स्वरूप और उन्हें शिव जी को निगलने की पौराणिक कथा
ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाने वाली धूमावती जयंती इस साल 22 जून 2026 को है। यह तंत्र साधना और दुखों के निवारण से जुड़ी सातवीं महाविद ...और पढ़ें

धूमावती अमावस्या 2026

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के मौके पर धूमावती जयंती मनाई जाती है। धूमावती का मतलब धुएं की तरह। माना जाता है कि तंत्र, साधना और दुखों का निवारण करने के लिए यह खास दिन मनाया जाता है।
बता दें कि 10 महाविद्याओं में से मां धूमावती सातवीं महाविद्या हैं। मां धूमावती का रूप अन्य देवी की प्रतिमाओं से काफी अलग है। आइए जानते हैं इस साल मां धूमावती जयंती कब मनाई जाएगी?
इस साल कब मनाई जाएगी धूमावती जयंती?
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल मां धूमावती जयंती सोमवार 22 जून 2026 को मनाई जाएगी। मां धूमावती तंत्र साधना से जुड़ी देवी मानी जाती हैं। इनकी आराधना वही लोग करते हैं, जो मानसिक रूप से अशांत, डर, दुश्मनों पर जीत हासिल करने की इच्छा रखते हैं। खासतौर से अमावस्या के मौके पर मां धूमावती की विशेष तंत्र साधना की जाती है।
जिन लोगों को तंत्र-मंत्र का ज्ञान नहीं है, वह भी अगर मां धूमावती के दर्शन करते हैं, तो उनके लिए यह काफी बेहद शुभ माना जाता है। मां केवल साधना से ही नहीं बल्कि भक्ति और श्रद्धा से भी खुश होते हैं।
मां धूमावती दिखती कैसी हैं?
श्वेत रंग के वस्त्र धारण किए, बाल खुले, हाथों में सूप और कौआ पर सवार हिंदू पौराणिक ग्रंथों में उनके रूप को लेकर यह उल्लेख किया गया है। मां अपनी साधकों की रक्षा तो करती ही हैं और तो और उनकी समस्त मनोकामनाएं भी पूरी करती हैं।
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धूमावती देवी की पूजन विधि
धूमावती देवी की पूजा के लिए उनकी जयंती का दिन अत्यंत पवित्र होता है, जो वैराग्य, ज्ञान, और दिव्यता की प्रतीक हैं। इस शुभ दिन पर मां की पूजा करने से समस्त दुखों से मुक्ति मिलती है। मां की पूजा के लिए कुछ खास विधि का पालन करना बेहद जरूरी है।
सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद हल्के रंग का कपड़ा धारण करें और शांत स्थान पर बैठें। पूजा करने से पहले पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ संकल्प लें।
इसके बाद लकड़ी के चबूतरे पर साफ कपड़ा बिछाएं। देवी धूमावती की एक प्रतिमा स्थापित करें। सरसों के तेल का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। गुड़हल के फूल या सूखे फूल अर्पित करना चाहिए क्योंकि मां धूमावती की पूजा में ताजे फूल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
काले तिल, सरसों का तेल और सूखे मेवे का साधारण सात्विक भोजन अर्पित करें। धूमावती की पूजा में मीठे व्यंजन आमतौर पर चढ़ाना वर्जित माने जाते हैं।
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मां धूमावती से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक बार माता पार्वती को काफी तेज भूख लगी। उन्होंने भगवान शिव से भोजन मांगा लेकिन शिवजी ने उन्हें कुछ देर इंतजार करने को कहा, भूख इतनी तीव्र थी कि, माता पार्वती ने शिव को ही निगल लिया।
कुछ समय भगवान शिव उनके शरीर से धूएं के रूप में बाहर निकले। शिव के वियोग में माता ने विधवा रूप धारण कर लिया। उसी समय से उनका नाम धूमावती पड़ गया। उसी समय से मा पार्वती के इस रूप का नाम धूमावती पड़ गया।
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