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    शिव जी को सावन ही क्यों पसंद है, चैत्र या आषाढ़ क्यों नहीं? स्कंद पुराण में छिपा है जवाब

    Updated: Thu, 18 Jun 2026 12:30 PM (IST)

    भगवान शिव को श्रावण मास अत्यंत प्रिय है, जिसके पीछे कई पौराणिक कथाएं और मान्यताएं हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में। ...और पढ़ें

    भगवान शिव को सावन का महीना क्यों प्रिय? (AI-Generated Image)

    भगवान शिव को सावन का महीना क्यों प्रिय? (AI-Generated Image)

    HighLights

    1. स्कंद पुराण में श्रावण मास को शिव का प्रिय बताया गया।

    2. देवी पार्वती ने सावन में तपस्या कर शिव को पति रूप में पाया।

    3. मारकंडेय ने सावन में शिव को प्रसन्न कर लंबी आयु पाई।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के मुताबिक, एक साल में कुल 12 महीने होते हैं। जहां दुनियाभर में नया साल जनवरी के महीने से शुरू होता है, वहीं हिंदू धर्म में चैत्र के महीने से नववर्ष की शुरुआत होती है। चैत्र की ही तरह सावन का भी महीना होता है। जो जुलाई से अगस्त तक रहता है।

    भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों के बीच श्रावण मास का अधिक महत्व है। इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। लेकिन कभी सोचा है आपने भगवान शिव को श्रावण का ही महीना इतना क्यों प्रिय है; चैत्र या आषाढ़ या और कोई सा मास उन्हें इतना प्रिय क्यों नहीं है?

    शिवजी को श्रावण मास प्रिय होने के संबंध में स्कंद पुराण के श्रावणमास महात्मय में एक श्लोक है-

    द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो मेऽतिवल्लभः ।तत्रैव सर्वथा पूजा कार्या श्रावणमासके ॥

    अर्थ- बारहों मासों में श्रावण का महीना मुझे काफी पसंद है। इसकी महिमा सुनने लायक है, इसे श्रावण कहा जाता है। इसलिए इस महीने में मेरी (भगवान शिव) की पूजा जरूर करनी चाहिए।

    पौराणिक कथा क्या कहती है? 

    इस संबंध में कई कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से एक कथा जिसका वर्णन स्कंद पुराण में देखने को मिलता है कि, जब संत कुमारों द्वारा भगवान शिव से सावन माह के प्रिय होने का कारण पूछा गया, तो भगवान शिव ने जबाव देते हुए कहा कि, जब देवी सती अपने पिता के द्वारा अपमान सहने के बाद योगशक्ति की सहायता से अपना देह त्याग किया, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में प्राप्त करने का प्राण लिया।

    अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने राजा हिमाचल और रानी मैना के घर में मां पार्वती के रूप में जन्म लिया। बताया जाता है कि, पार्वती माता अपनी युवावस्था में सावन के महीने में अन्न, जल त्याग कर निराहार रहते हुए कठोर तपस्या और व्रत किया था। मां पार्वती के इस कठोर संकल्प को देखकर महादेव ने मां पार्वती से विवाह कर लिया। माना जाता है कि, तभी से भगवान शिव को श्रावण मास अत्यंत प्रिय है।

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    इसके अलावा सावन मास को लेकर यह भी कथा प्रचलित है कि, सावन के महीने में भगवान शिव धरती पर अवतिरत होकर अपने ससुराल पहुंचे थे और वहां उनका स्वागत अर्घ्य देकर जलाभिषेक किया गया था। माना जाता है कि हर साल सावन के महीने में भगवान शिव अपने ससुराल आते हैं।

    भगवान शिव को सावन प्रिय क्यों है

    भगवान शिव को सावन का महीना क्यों प्रिय है? (AI-Generated Image)

    मारकंडेय की घोर तपस्या से जुड़ी कथा

    इसके अलावा शिवजी को सावन मास प्रिय होने से जुड़ी एक लोक कथा और प्रचलित है। कथा के मुताबिक, मरकंडू ऋषि के पुत्र मारकंडेय द्वारा लंबी उम्र प्राप्त करने के लिए सावन के महीने में ही घोर तप कर भगवान शिव को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त की थी। इससे उन्हें खास मंत्र शक्तियां हासिल हुई, जिसके आगे यमराज भी कमजोर पड़ गए। इन्हीं वजहों से भगवान शिव को सावन का महीना अत्यंत प्रिय है।

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