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पहली बार जा रहे हैं खाटू श्याम? मंदिर परिसर में प्रवेश से पहले जान लें ये जरूरी बातें

Published: Fri, 10 Apr 2026 03:16 PM (GMT+05:30)

कहते हैं कि 'शीश के दानी' और 'हारे का सहारा' कहलाने वाले बाबा श्याम के दरबार में जो भी भक्त ...और पढ़ें

खाटू श्याम मंदिर यात्रा के नियम

खाटू श्याम मंदिर यात्रा के नियम

HighLights

  1. रींगस से शुरू होती है खाटू श्याम जी की निशान यात्रा

  2. दर्शन के लिए सबसे शुभ मानी गई है एकादशी

  3. बाबा श्याम को भोग के रूप में जरूर अर्पित करें चूरमा

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप खाटू श्याम जाने का मन बना रहे हैं, तो आपको यह जानना जरूरी है कि बाबा की यात्रा केवल मुख्य मंदिर के दर्शन मात्र से पूरी नहीं होती। अपनी यात्रा को सफल और पुण्यदायी बनाने के लिए आपको कुछ विशेष बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। साथ ही आपको मंदिर परिसर में जाते समय प्रशासन द्वारा तय किए गए नियमों का भी पालन करना चाहिए, ताकि आपको दर्शन में किसी तरह की असुविधा न हो।

इन स्थानों के दर्शन के बिना अधूरी है यात्रा

खाटू श्याम मंदिर जाते समय रास्ते में आने वाले रींगस से 'निशान' यात्रा शुरू होती है। यह मुख्य मंदिर से करीब 17 किलोमीटर दूर है। परंपरा के अनुसार, भक्त रींगस से बाबा का पवित्र 'निशान' (ध्वजा) उठाकर पैदल यात्रा करते हुए मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस निशान को मंदिर में अर्पित करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं।

इसके साथ ही मुख्य मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर दूर 'श्याम कुंड' भी स्थित है। माना जाता है कि इसी जगह पर वीर बर्बरीक (खाटू श्याम जी) ने भगवान श्रीकृष्ण को अपने शीश का दान दिया था। साथ ही यह भी मान्यता है कि इस कुंड का जल कभी नहीं सूखता और इसका सीधा संबंध पाताल लोक से है।

Khatu Shyam ai

(Picture Credit- AI Generated)

दर्शन के लिए कौन-सा दिन है सबसे शुभ?

वैसे तो आप किसी भी समय खाटू श्याम जी के दर्शन करते लाभ प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए हर माह में आने वाली एकादशी और द्वादशी की तिथि को सबसे उत्तम माना जाता है। इसके साथ ही फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी आमलकी एकादशी को खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए एक महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है।

क्योंकि यह तिथि खाटू श्याम जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इस दिन पर यहां बहुत बड़ा मेला भी लगता है, जिसे फाल्गुन मेला कहते हैं। कुछ भक्त कार्तिक माह में आने वाली एकादशी को भी बाबा श्याम का प्राकट्य दिवस के रूप में मानते हैं। इस दिन भी दर्शन का विशेष महत्व माना गया है।

बाबा श्याम को क्या-क्या अर्पित करें?

अगर आप बाबा के दर्शन के लिए जा रहे हैं, तो उनकी प्रिय चीजें जैसे गुलाब का फूल, मोरपंख और इत्र उन्हें अर्पित कर सकते हैं। साथ ही भोग के रूप में आप खाटू श्याम जी को गाय के दूध से बनी मिठाइ, खीर या फिर चूरमे का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा नारियल भी चढ़ाया जाता है। बाबा श्याम को भोग लगाने के बाद आप प्रसाद के रूप अन्य लोगों में चूरमा बांट सकते हैं, जो बहुत फलदायी माना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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