भगवान नरसिंह के इस मंदिर में दर्शन के लिए करना पड़ता है सालभर का इंतजार
सिंहाचलम मंदिर भगवान नरसिंह को समर्पित है, जहां उनकी मूर्ति सालभर चंदन की मोटी परत से ढकी रहती है। ...और पढ़ें

भगवान नरसिंह के दर्शन के लिए करना पड़ता है सालभर इंतजार (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
सिंहाचलम मंदिर में है भगवान नरसिंह की चंदन से ढकी मूर्ति
अक्षय तृतीया पर 24 घंटे के लिए होता है निजरूप दर्शन
भक्त प्रह्लाद ने करवाया था इस दिव्य मंदिर का निर्माण
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सिंहाचलम मंदिर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित एक दिव्य मंदिर है। यहां साल में केवल 24 घंटे के लिए भगवान नरसिंह की मूर्ति से 'चंदन की परत', हटाई जाती है और तभी यह मंदिर दर्शन के लिए खुलता है। चलिए जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी कुछ अनोखी बातें, जो आपको हैरान कर सकती हैं।
कहां स्थित है यह दिव्य धाम?
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में स्थित सिंहाचलम मंदिर आस्था और वास्तुकला का एक अद्भुत संगम है। वराह लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर विशाखापट्टनम से लगभग 16 किमी दूर, सिंहाचल पर्वत की चोटी पर स्थित है। इस कारण इस मंदिर को सिंहाचलम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं प्रह्लाद जी ने करवाया था।

इसलिए लगाया जाता है चंदन का लेप
भगवान विष्णु का नरसिंह अवतार वीरता और उग्रता का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिरण्यकशिपु का वध करने के बाद नरसिंह भगवान का क्रोध अत्यंत बढ़ गया। सभी देवताओं को उनको शांत कराने की कोशिश निष्फल रही।
तब अपने परम भक्त प्रह्लाद की प्रार्थना पर प्रभु शांत हुए और सिंहाचलम पर्वत पर प्रकट हुए। उनके तेज और उग्रता को कम करने के लिए उन्हें चंदन से शीतल रखा जाता है। यही कारण है कि वे वर्षभर चंदन से ढके रहते हैं, ताकि उनका स्वरूप सौम्य बना रहे।
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कब खुलता है यह मंदिर
चंदन की मोटी परत से ढके रहने के कारण भगवान नरसिंह की मूर्ति एक शिवलिंग के आकार में दिखाई देती है। केवल अक्षय तृतीया के दिन ही यह चंदन हटाया जाता है, जिसे 'निजरूप दर्शन' या 'चंदनोत्सव' कहा जाता है। भक्त केवल इसी दिन भगवान के असली विग्रह को देख पाते हैं।
ऐसे में अक्षय तृतीया के दिन इस मंदिर में भक्तों की भीड़ देखने लायक होती है। वहीं नरसिंह जयंती के मौके पर भी भक्त यहां पहुंचते हैं। साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी, वहीं नरसिंह जयंती का पर्व 30 अप्रैल को मनाया जाएगा।
मंदिर की खासियत
आमतौर पर भगवान नरसिंह के अन्य मंदिरों में उनका उग्र रूप देखने को मिलेगा, लेकिन सिंहाचलम मंदिर में भगवान मां लक्ष्मी के साथ अत्यंत सौम्य और शांत मुद्रा में विराजमान हैं। वहीं अगर मंदिर के वास्तुकला की बात की जाए, तो इस मंदिर में चोल, चालुक्य और कलिंग शैलियों का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है।
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