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    जब भयंकर सूखे में शिवलिंग से निकली थी जलधारा: मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर का अद्भुत चमत्कार

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 01:00 PM (IST)

    मंदसौर में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अनोखा तीर्थ स्थल है, जहां अष्टमुखी शिवलिंग स्थापित है। यह शिवलिंग जीवन की आठ अवस्थाओं का प्रत ...और पढ़ें

    मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थित है आठ मुख वाला शिवलिंग

    मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थित है आठ मुख वाला शिवलिंग

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में भगवान शिव से जुड़े कई अनोखे और खास मंदिर हैं, जो अपनी अनूठी पहचान के लिए जाने जाते हैं। ऐसा ही एक खास मंदिर मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थित पशुपतिनाथ जी का मंदिर भी है, जो भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर के सबसे आकर्षक पहलुओं में शामिल है इसके गर्भगृह में स्थापित भगवान शिव से जुड़ा शिवलिंग, जो अपने अष्ट मुख यानी आठ मुंह के लिए काफी प्रसिद्ध है।

    पशुपतिनाथ मंदिर शिवना नदी के किनारे पर बसा है और भगवान शिव से जुड़े भक्तों के लिए काफी महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल भी माना जाता है। माना जाता है कि, पशुपति नाथ मंदिर में अष्ट मुख वाला शिवलिंग बचपन से लेकर बुढ़ापे तक जीवन की आठ विभिन्न अवस्थाओं का प्रतीक है।

    शिवलिंग से जुड़ी पौराणिक कहानी?

    मध्य प्रदेश के मंदसौर में भगवान शिव के पशुपति नाथ मंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग की खोज की कहानी का खास महत्व है। बताया जाता है कि, छठी या सातवीं शताब्दी के आसपास औलिकर वंश के शासनकाल के दौरान, एक ग्वाला जिसका नाम पुण्य दास था, नदी के किनारे अपने पशुओं को चरा रहा था। काम करते हुए उसे एक बेहद खास दृश्य दिखाई दिया, पानी से एक दिव्य शिवलिंग बाहर आया।

    इस दिव्य खोज से प्रसन्न होकर पुण्य दास ने शिवलिंग की पवित्रता और महत्वता को समझते हुए उस स्थान पर एक मंदिर की स्थापना की। पुण्य दास द्वारा बनाए गए इसी मंदिर को आज हम पशुपतिनाथ मंदिर के नाम से जानते हैं। बताया जाता है कि, यहां पर शिवलिंग की स्थापना सोमवार के दिन हुई थी, जिस वजह से मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में इस दिन मेला भी लगता है।

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    अष्टमुखी शिवलिंग का रहस्य

    पशुपतिनाथ मंदिर में स्थापित विशाल अष्टमुखी शिवलिंग का वजन कुल 4600 किलोग्राम है। 7.25 फीट की आकर्षक घुमावदार आकृति में विराजमान यह शिवलिंग सीधी रेखा में 11.25 फीट की ऊंचाई तक पहुंचता है। शिवलिंग की संरचना के शीर्ष पर आठ सिर हैं, जो दो हिस्सों में विभाजित हैं।

    जिनमें से प्रत्येक सिर अलग-अलग दिशाओं का प्रतिनिधित्व करता है। मंदसौर में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर इस इलाके का एकमात्र ऐसा मंदिर नहीं है, जिसमें भगवान शिव के शिवलिंग को पूजा जाता हो, बल्कि मंदसौर अपने कई मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।

    Shree Pashupatinath Mandir Mandsaur, Madhya Pradesh

     (Picture Credit: ) 

    शिवलिंग से जुड़ी चमत्कारिक कहानी

    पशुपतिनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग से जुड़ी एक अनोखी और चमत्कारिक घटना यह है कि, एक बार मंदसौर में भीषण सूखे के दौरान मंदिर का कुआं पूरी तरह सूख गया था। भक्तों की दुर्दशा देखकर भगवान पशुपति ने मंदिर के अंदर स्थित शिवलिंग से जल बहाकर अपनी दिव्य उपस्थिति दर्ज कराई। इस चमत्कारी घटना ने न सिर्फ शहर की प्यार बुझाई बल्कि मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति को भी मजबूत किया।

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    Source- mptourism

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।