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    साल में 1 बार होते हैं इस मूर्ति के दर्शन, इसलिए भगवान नरसिंह पर किया जाता है चंदन का लेप

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 01:09 PM (GMT+05:30)

    भारत में भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों को समर्पित कई मंदिर स्थापित हैं, जिसकी अपनी-अपनी मान्यताएं है। आज हम आपको भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार से जुड ...और पढ़ें

    Raha Lakshmi Narasimha Temple Simhachalam

    Raha Lakshmi Narasimha Temple Simhachalam

    HighLights

    1. सिंहाचलम मंदिर में साल में एक बार होते हैं दर्शन।

    2. भगवान नरसिंह को लगाया जाता है चंदन का लेप।

    3. अक्षय तृतीया के दिन होते हैं निजरूप दर्शन।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नरसिंह भगवान, प्रभु श्रीहरि के चौथे अवतार हैं। भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा और हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए नरसिंह अवतार लिया था, जो अर्ध सिंह (शेर)  और अर्ध नर (मनुष्य) का था।  भगवान विष्णु का यह स्वरूप काफी उग्र माना जाता है। आज हम आपको नरसिंह भगवान से जुड़े एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका दर्शन साल में केवल एक ही बार होता है।

    कहां स्थित है मंदिर

    सिंहाचलम मंदिर विशाखापट्टनम से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर सिंहाचल पर्वत पर स्थापित है। ‘सिंहाचलम’ नाम दो शब्दों यानी 'सिंह' अर्थात शेर और 'अचल' अर्थात 'पर्वत' से मिलकर बना है। इस मंदिर में भगवान नरसिंह की मूर्ति पर मोटे चंदन की परत लगाई जाती है, जिसे लेकर यह मान्यता है कि इससे भगवान नरसिंह का उग्र स्वरूप शांत बना रहता है।

    साल में केवल  एक बार यानी अक्षय तृतीया के दिन चंदन की यह परत हटाई जाती है, जिससे भक्त, भगवान के दर्शन का लाभ ले पाते हैं। इस दिन को चंदनोत्सव के तौर पर मनाया जाता है और इस दर्शन को 'निजरूप दर्शन' कहा जाता है।

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    क्या है पौराणिक कथा

    सिंहाचलम मंदिर को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकशिपु का वध करने के बाद नरसिंह देव जी का क्रोध अत्यंत बढ़ गया। तब प्रह्लाद जी ने भगवान से शांत होने का अनुरोध किया।

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    भगवान नरसिंह ने अपने भक्त की इस प्रार्थना को स्वीकार किया और वह सिंहाचलम पर्वत पर 'शांत रूप' में प्रकट हुए। माना जाता है कि तब प्रह्लाद जी ने इस स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया। साथ ही यह भी मान्यता है कि भगवान ने स्वयं प्रह्लाद से कहा था कि वे सालभर चंदन से ढके रहेंगे, ताकि उनका उग्र रूप शांत बना रहे।

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    मंदिर की खासियत

    इस मंदिर में नरसिंह भगवान मां लक्ष्मी के साथ विराजमान हैं। सिंहाचलम मंदिर को नरसिंह भगवान का घर भी कहा जाता है। यहां पर भगवान नरसिंह का जो विग्रह यानी प्रतिमा स्थापित है, वह सौम्य मुद्रा में है, जो आपको किसी अन्य भगवान नरसिंह के मंदिर में देखने को नहीं मिलेगी। अक्षय तृतीया और नृसिंह जयंती के दिन इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

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