केदारनाथ से कल्पेश्वर तक: महादेव के 5 रहस्यमयी मंदिर, जहां दर्शन मात्र से धुल जाते हैं सारे पाप!
हिंदू धर्म में पंच केदार की तीर्थयात्रा को शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि के लिए एक आध्यात्मिक मार्ग माना जाता है। यह उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थि ...और पढ़ें

पंच केदार का धार्मिक महत्व (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंच केदार की तीर्थयात्रा को अधिक पवित्र माना जाता है। इस यात्रा को शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि के लिए के लिए एक आध्यात्मिक मार्ग माना जाता है। यह पंच केदार उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित हैं। इन पंच केदार की उत्पत्ति महाभारत काल की एक कथा से जुड़ी है।
पौराणिक कथा के अनुसार, कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से छुटकारा पाने के लिए हिमालय पहुंचे, लेकिन उनसे शिव जी नाराज थे, जिसकी वजह से पांडवों को महादेव दर्शन नहीं देना चाहते थे। इसलिए महादेव बैल का रूप धारण कर जमीन में लुप्त हो गए।
मान्यता के अनुसार, जब बैल रूपी शिव जमीन में समाए, तो उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से हिमालय के पांच विभिन्न स्थानों पर प्रकट हुए। इन्हीं 5 जगहों पर पांडवों के द्वारा महादेव की पूजा-अर्चना की गई, जिन्हें पंच केदार के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं कौन-से हैं पंच केदार और इनके महत्व के बारे में।
-1778054995549.jpg)
(Picture Credit- AI Generated)
केदारनाथ
केदारनाथ मंदिर पंच केदार में सबसे प्रमुख है। यहां पर बैल रूपी अवतार का पीठ का हिस्सा प्रकट हुआ था। केदारनाथ को आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, केदारनाथ मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना और दर्शन करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
खबरें और भी
तुंगनाथ
ऐसा माना जाता है कि तुंगनाथ में भगवान शिव का हाथ प्रकट हुआ था। भगवान शिव यह मंदिर सबसे ऊंचाई पर स्थित है। पांडवों ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए तुंगनाथ मंदिर का निर्माण किया था। यहां शिव जी के दर्शन करने से मन को शांति मिलती है।
रुद्रनाथ
रुद्रनाथ में भगवान शिव का मुख प्रकट हुआ था। यहां पर महादेव की पूजा-अर्चना नीलकंठ के रूप में होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रुद्रनाथ मंदिर में साधना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ महादेव की कृपा बरसती है।
मध्यमहेश्वर
यहां पर भगवान शिव की नाभि प्रकट हुई थी। पांडवों ने शिव जी की आराधना की थी। इसे मोक्ष और शांति का केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त मध्यमहेश्वर मंदिर में शिव जी की पूजा-अर्चना करते हैं उसे सभी पापों से छुटकारा मिलता है और महादेव की कृपा बरसती है।
कल्पेश्वर
जहां पर कल्पेश्वर मंदिर है। उसी जगह पर भगवान शिव की जटाएं प्रकट हुई थी। यह एकमात्र ऐसा केदार है, जिसके कपाट साल भर भक्तों के लिए खुले रहते हैं।
यह भी पढ़ें- सारे तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार: जानें क्यों है इस तीर्थ का इतना बड़ा महत्व?
यह भी पढ़ें- जीवन के कष्टों से चाहिए मुक्ति? प्रयागराज संगम तट पर विराजे 'लेटे हुए हनुमान जी' के करें दर्शन
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।