जीवन के कष्टों से चाहिए मुक्ति? प्रयागराज संगम तट पर विराजे 'लेटे हुए हनुमान जी' के करें दर्शन
देशभर में हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। प्रयागराज के त्रिवेणी संगम किनारे स्थित लेटे हुए हनुमान मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

लेटे हनुमान जी के दर्शन करने से संकट होते हैं दूर (Pic Credit-Instagram)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में आज हनुमान जन्मोत्सव का पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जी जन्म का हुआ था। इसलिए इस दिन को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर भक्त हनुमान जी के दर्शन करने लिए मदिरों में पहुंचते हैं।
हनुमान जन्मोत्सव के दिन प्रयागराज में स्थित लेटे हुए हनुमान जी के मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। यह मंदिर भक्तों की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है। यहां त्रिवेणी संगम किनारे हनुमान जी लेटी हुई अवस्था में भक्तों को दर्शन देते हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इस मंदिर (Lete Hanuman Mandir) से जुड़े रहस्य के बारे में।
(Image Source: AI-Generated)
त्रिवेणी संगम के किनारे लेटे हनुमान मंदिर स्थित है। इस मंदिर में बजरंगबली जी की मूर्ति लगभग 20 फीट लंबी है। यह मंदिर देश के प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है। जब गंगा नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो मां गंगा हनुमान जी के चरणों को स्पर्श करती हैं। इस दृश्य को देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, लेटे हुए हनुमान जी के दर्शन करने से भक्त की सभी मुरादें पूरी होती हैं और जीवन में आने वाले सभी दुख-दर्द दूर होते हैं। संगम में स्नान करने के बाद लेटे हुए हनुमान जी के दर्शन करना आवश्यक है। ऐसा माना जाता है कि संगम में स्नान के बाद हनुमान जी के दर्शन न करने से भक्तों को शुभ फल की प्राप्ति नहीं होती है। हनुमान जी के दाएं तरफ भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जी विराजमान हैं। बाएं हाथ में हाथ में गदा है। किसी खास अवसर पर मंदिर में बेहद खास रौनक देखने को मिलती है। इस मंदिर को किला वाले हनुमान जी और बड़े हनुमान जी के नाम से जाना जाता है।
मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब हनुमान जी लंका पर विजय हासिल करने के बाद लौट रहे थे, तो तब मार्ग में उन्हें थकान महसूस हुई। इस दौरान माता सीता ने बजरंगबली से कहा कि आपको संगम के तट पर विश्राम करना चाहिए। माता सीता के कहने पर हनुमान जी ने संगम किनारे विश्राम किया। इसलिए इसी स्थान पर हनुमान जी की लेटी हुई अवस्था में पूजा-अर्चना की जाती है।
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