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वृंदावन का वो मंदिर जहां गोपियों को मिले थे श्रीकृष्ण, दर्शन मात्र से पूरी होती है हर अधूरी मुराद

Published: Tue, 24 Mar 2026 12:30 PM (IST)Updated: Tue, 24 Mar 2026 12:52 PM (IST)

वृंदावन स्थित मां कात्यायनी शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है। पढ़ें इस मंदिर का इतिहास, माता सती के केश गिरने की कथा। श्रीमद्भागवत पुराण में इसकी कथा वर्णित है।

Maa Katyayani Shakti Peeth: मां कात्यायनी शक्तिपीठ (Image Source: AI-Generated)

Maa Katyayani Shakti Peeth: मां कात्यायनी शक्तिपीठ (Image Source: AI-Generated)

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेक्स, नई दिल्ली। वृंदावन की पावन धरती पर स्थित मां कात्यायनी (Maa Katyayni) शक्तिपीठ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और प्रेम का वो केंद्र है। जहां, स्वयं राधा रानी और गोपियों ने तपस्या की थी।

वृंदावन का नाम आते ही मन में बांके बिहारी की छवि उभरती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रज भूमि की रक्षा और यहां की अधिष्ठात्री देवी स्वयं मां कात्यायनी हैं? वृंदावन के राधा बाग इलाके में स्थित यह शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के हिस्से किए थे, तब यहां देवी के 'केश' (बाल) गिरे थे। इसी कारण इस स्थान को 'उमा शक्तिपीठ' भी कहा जाता है।

हिमालय की तपस्या और मंदिर का निर्माण

इस भव्य मंदिर का इतिहास भी किसी चमत्कार से कम नहीं है। सन् 1923 में स्वामी केशवानंद महाराज ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। स्वामी जी ने 33 सालों तक हिमालय की कंदराओं में कठिन साधना की थी। अपनी साधना के दौरान उन्हें एक दिव्य दृष्टि प्राप्त हुई, जिसमें उन्हें वृंदावन में इस लुप्त शक्तिपीठ को ढूंढने और मंदिर स्थापित करने का आदेश मिला। योगबल से उन्होंने इस स्थान को पहचाना और आज यह भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है।

Maa Katyayni Shaktipeeth

(Image Source: AI-Generated)

मंदिर की बनावट और अष्टधातु की प्रतिमा

सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर देखने में अत्यंत भव्य है। मंदिर के मुख्य द्वार पर दो सुनहरे शेर खड़े हैं, जो माता की शक्ति का अहसास कराते हैं। गर्भगृह में मां कात्यायनी की अष्टधातु से बनी विशाल प्रतिमा विराजमान है। मां की चार भुजाएं हैं:

  • दाहिनी भुजाओं में अभय और वर मुद्रा है।
  • बाईं भुजाओं में तलवार और कमल का पुष्प है।

मां के साथ यहां भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu), शिव (Lord Shiva), सूर्य और गणेश जी (Ganesh Ji) की मूर्तियां भी स्थापित हैं, जो इसे एक पूर्ण पंचदेव मंदिर बनाती हैं।

जब गोपियों के लिए श्रीकृष्ण ने रचाया 'महारास'

इस मंदिर का सबसे गहरा संबंध द्वापर युग (Dwapar yug) और भगवान श्रीकृष्ण से है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, वृंदावन की गोपियां श्रीकृष्ण को पति रूप में पाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने पूरा कार्तिक मास यमुना किनारे मां कात्यायनी की बालू (रेत) से मूर्ति बनाकर पूजा की थी।

उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां कात्यायनी ने उन्हें वरदान दिया। इसी वरदान के फलस्वरूप शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने 16108 रूप धारण किए और हर गोपी के साथ महारास रचाया। आज भी यह माना जाता है कि जो कुंवारे युवक-युवतियां यहां आकर माता के दर्शन करते हैं, उनके विवाह में आ रही हर अड़चन दूर हो जाती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।