हनुमान जन्मोत्सव आज, नोट करें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और बजरंगबली के मंत्र
हनुमान जन्मोत्सव पर जानें कैसे करें हनुमान जी की पूजा। साथ ही, पूजा विधि से लेकर शुभ मुहूर्त और उदया तिथि के महत्व के बारे में। ...और पढ़ें
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Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव 2026 (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है और पूरा देश पवनपुत्र हनुमान जी का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मना रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर माता अंजनी की कोख से साक्षात भगवान शिव के अंश, बजरंगबली का प्राकट्य हुआ था।
हनुमान जी (Hanuman Ji) को भगवान शिव के रुद्र अवतारों में से एक माना जाता है, जो शक्ति, भक्ति और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है क्योंकि उदया तिथि के आधार पर ही आज यह पर्व मनाया जा रहा है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के पश्चात लाल या नारंगी रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। वस्त्र धारण करने के बाद हाथ जोड़कर पवित्र मन से व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
हनुमान जन्मोत्सव 2026: शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 1 अप्रैल 2026, सुबह 07:02 बजे से।
पूर्णिमा तिथि का समापन: 2 अप्रैल 2026, सुबह 07:42 बजे तक।
उदया तिथि: आज (2 अप्रैल) सुबह 07:42 बजे तक पूर्णिमा तिथि व्याप्त रहने के कारण शास्त्रों के अनुसार आज ही जन्मोत्सव मनाना श्रेष्ठ है।
इन धार्मिक मान्यताओं और पूजा विधि का मुख्य आधार हमारे पौराणिक ग्रंथ 'शिव पुराण' और 'स्कंद पुराण' हैं, जहां हनुमान जी को शिव का अवतार बताया गया है। साथ ही, 'निर्णय सिंधु' जैसे ग्रंथों के आधार पर उदया तिथि के महत्व को समझा गया है, जिसके अनुसार सूर्योदय वाली तिथि ही उत्सव के लिए मान्य होती है।

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हनुमान जन्मोत्सव: सरल पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और बजरंगबली के प्रिय लाल या नारंगी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना पूर्ति और व्रत (यदि रख रहे हैं) का संकल्प लें।
- पूजा स्थान पर एक लकड़ी की चौकी रखें, उस पर सफेद कपड़ा बिछाएं और हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- हनुमान जी के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती/धूप दिखाएं।
- बजरंगबली को लाल सिंदूर, चंदन और चमेली का तेल अर्पित करें। आज के दिन उन्हें सिंदूरी चोला चढ़ाना सबसे उत्तम माना जाता है।
- भगवान को पंचामृत से प्रतीकात्मक स्नान कराएं और फिर उन्हें बेसन या बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं। आप गुड़-चना भी चढ़ा सकते हैं।
- माला लेकर 'ॐ हं हनुमते नम:' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। साहस के लिए हनुमान गायत्री मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
- श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा, बजरंगबाण या सुंदरकांड का पाठ करें।
- अंत में कपूर या घी के दीपक से हनुमान जी की आरती गाएं और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।
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हनुमान जी के मंत्र
1. अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
2. ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः
3. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय
प्रकट-पराक्रमाय महाबलाय सूर्यकोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।
4. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय रामसेवकाय
रामभक्तितत्पराय रामहृदयाय लक्ष्मणशक्ति
भेदनिवावरणाय लक्ष्मणरक्षकाय दुष्टनिबर्हणाय रामदूताय स्वाहा।
5. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय
सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।
6. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय देवदानवर्षिमुनिवरदाय रामदूताय स्वाहा।
7. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय भक्तजनमनः कल्पनाकल्पद्रुमायं
दुष्टमनोरथस्तंभनाय प्रभंजनप्राणप्रियाय महाबलपराक्रमाय
महाविपत्तिनिवारणाय पुत्रपौत्रधनधान्यादिविधिसम्पत्प्रदाय रामदूताय स्वाहा।
8. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय वज्रदेहाय वज्रनखाय वज्रमुखाय
वज्ररोम्णे वज्रदन्ताय वज्रकराय वज्रभक्ताय रामदूताय स्वाहा।
9. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय परयन्त्रतन्त्रत्राटकनाशकाय
सर्वज्वरच्छेदकाय सर्वव्याधिनिकृन्तकाय सर्वभयप्रशमनाय
सर्वदुष्टमुखस्तंभनाय सर्वकार्यसिद्धिप्रदाय रामदूताय स्वाहा।
10. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय पच्चवदनाय पूर्वमुखे सकलशत्रुसंहारकाय रामदूताय स्वाहा।
11. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय पच्चवदनाय पश्चिममुखे
गरुडाय सकलविघ्ननिवारणाय रामदूताय स्वाहा।
12. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय अक्षिशूलपक्षशूल शिरोऽभ्यन्तर
शूलपित्तशूलब्रह्मराक्षसशूलपिशाचकुलच्छेदनं निवारय निवारय स्वाहा।
13. ऊँ दक्षिणमुखाय पंचमुखहनुमते करालवदनाय नारसिंहाय
ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रौं ह्रः सकलभूतप्रेतदमनाय स्वाहा।
14. ऊँ पूर्वकपिमुखाय पंचमुखहनुमते टं टं टं टं टं सकल शत्रुसंहरणाय स्वाहा।
15. ॐ हं हनुमत्ये नमो नमः
श्री हनुमत्ये नमो नमः
जय जय हनुमत्ये नमो नमः
श्री राम दुताय नमो नमः ।।
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