हनुमान जन्मोत्सव पर भूलकर भी इस समय न करें सुंदरकांड का पाठ, पहले जान लें सही नियम और विधि
हनुमान जन्मोत्सव 2026 पर सुंदरकांड का पाठ करने जा रहे हैं? यहां जानें शास्त्रों के अनुसार पाठ का सही समय, पूजा विधि, नियम और इसके चमत्कारी फायदे। ...और पढ़ें

Sundarkath Path Rituals: हनुमान जन्मोत्सव 2026 (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हनुमान जन्मोत्सव (Hanuman Janmotsav 2026) का पावन पर्व आ गया है। संकटमोचन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हम में से बहुत से लोग इस दिन घरों या मंदिरों में 'सुंदरकांड' का पाठ करते हैं। सुंदरकांड को गोस्वामी तुलसीदास जी की रामचरितमानस का सबसे खास हिस्सा माना जाता है।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इसका पूरा फल पाने के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है? शास्त्रों में सुंदरकांड पढ़ने की एक सही विधि बताई गई है। यहां जानें कि पाठ कैसे करना चाहिए और इसके क्या-क्या फायदे हैं।
सुंदरकांड पढ़ने का सही तरीका और नियम
सबसे पहली और जरूरी बात है समय। शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, सुंदरकांड का पाठ या तो सुबह के समय करना चाहिए या फिर शाम को 4 बजे के बाद। कहा जाता है कि दोपहर 12 बजे के बाद पाठ शुरू करना ज्यादा शुभ नहीं होता और इसका पूरा फल नहीं मिल पाता।
इसके बाद नहा-धोकर साथ कपड़े पहनें। फिर एक साफ चौकी लें और उस पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछा लें। फिर वहां हनुमान जी (Hanuman Ji) की एक प्यारी सी तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। पाठ शुरू करने से पहले प्रभु श्री राम और हनुमान जी को प्रणाम करें और उनकी पूजा करें।
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एक बात का खास ध्यान रखें कि जब आप पाठ पढ़ने बैठें, तो उसे बीच में अधूरा न छोड़ें और न ही किसी से बातचीत करें। अपना पूरा ध्यान सिर्फ पाठ पर लगाएं और मन में कोई भी नेगेटिव बात (नकारात्मक विचार) न आने दें।

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पाठ पूरा होने के बाद बजरंगबली को फल, बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। आप चाहें तो उन्हें मेहंदी भी अर्पित कर सकते हैं। अंत में पूरे भाव से हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji ki Aarti) जरूर करें और फिर परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर प्रसाद ग्रहण करें।
सुंदरकांड पढ़ने के क्या फायदे हैं?
- धार्मिक शास्त्रों में बताया गया है कि हनुमान जन्मोत्सव या मंगलवार जैसे शुभ दिनों पर सुंदरकांड पढ़ने से जीवन के बड़े से बड़े संकट आसानी से टल जाते हैं।
- जब आप इसे पढ़ते हैं, तो मन का सारा तनाव दूर हो जाता है और आत्मा को एक अजीब सा सुकून मिलता है।
- यह पाठ इंसान को बुरे और गलत रास्तों को छोड़कर, सच्चाई और अच्छाई के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।
- ज्योतिष शास्त्रों की मानें तो, अगर आपकी कुंडली में कुछ ग्रह परेशान कर रहे हैं (प्रतिकूल ग्रह), तो सुंदरकांड का पाठ (Sunderkand Ka Path) उन ग्रहों के बुरे असर से भी आपकी रक्षा करता है।
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