वो चमत्कारी शक्तिपीठ जिसकी श्रीराम ने की थी पूजा, दर्शन करने से दूर होते हैं भक्तों के कष्ट
पौराणिक कथा के अनुसार, शिव जी के मोह को भंग करने के लिए विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से मां सती के शरीर के कई टुकड़े कर दिए थे, जो धरती के अलग-अलग स ...और पढ़ें

Ramgiri Shaktipeeth in Chitrakoot जानिए इस दिव्य शक्तिपीठ का महत्व।
HighLights
51 शक्तिपीठों में शामिल है चित्रकूट का यह दिव्य शक्तिपीठ
राम जी ने की थी चित्रकूट के इस शक्तिपीठ की पूजा
देवी करती हैं भक्तों के सभी कष्टों का निवारण
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चित्रकूट में रामगिरी शक्तिपीठ स्थित है, जिसे रामगिरि शिवानी शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है। यह हिंदू धर्म के पवित्र 51 शक्तिपीठों में शामिल है। यह स्थान केवल देवी मां की शक्ति का केंद्र नहीं है, बल्कि भगवान राम से भी इस स्थान का गहरा नाता जुड़ा हुआ है। चलिए जानते हैं इस बारे में।
भगवान राम ने की थी पूजा
हिंदू धर्म में देवी सती को समर्पित शक्तिपीठों की विशेष मान्यता है। विभिन्न धर्म ग्रंथों में इन शक्तिपीठों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त इस सभी शक्तिपीठों के दर्शन कर लेता है, उसके जीवन के सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। चित्रकूट (Chitrakoot) में रामगिरी शक्तिपीठ के संबंध में यह माना जाता है कि अपने वनवास के दौरान भगवान राम ने इस स्थान पर पूजा-अर्चना की थी, जिस कारण इस स्थान का महत्व और भी बढ़ जाता है।

(AI Generated Image)
इसलिए पड़ा रामगिरि शक्तिपीठ नाम
वाल्मीकि रामायण में इस बात का वर्णन मिलता है कि भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने वनवास के साढ़े ग्यारह वर्ष उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बिताए थे। भगवान राम द्वारा चित्रकूट में स्थित इस शक्तिपीठ की पूजा-अर्चना करने के कारण इस शक्तिपीठ को रामगिरि शक्तिपीठ के नाम से जाना जाने लगा। यही कारण है कि रामनवमी का पर्व यहां विशेष रूप से मनाया जाता है।
बता दें कि कुछ अन्य मान्यताओं के अनुसार, मध्य प्रदेश के मैहर में स्थित शारदा देवी मंदिर को शक्ति पीठ माना गया हैं, तो वहीं कुछ लोग उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में स्थित शारदा मंदिर (Sharda Devi Temple) को शक्ति पीठ मानते हैं। इसे लेकर अलग-अलग मत देखने को मिलते हैं।
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पूर्ण होती हैं भक्तों की मनाकोमनाएं
माना जाता है कि उत्तर प्रदेश में मंदाकिनी नदी के पास मां सती का दायां स्तन गिरा था, जिसे शिव पुराण में शिवानी शक्ति पीठ के रूप में वर्णित किया गया है। इस शक्तिपीठ में स्थापित देवी को 'शिवानी' के रूप में पूजा जाता है। देवी के साथ ही भगवान शिव के भैरव रूप भी यहां विराजमान हैं, जिन्हें 'चंड' कहते हैं।
रामगिरी शक्तिपीठ (Ramgiri Shaktipeeth) को लेकर यह मान्यता चली आ रही है कि इस स्थान के दर्शन मात्र से भक्तों को अपनी विपत्तियों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही सभी मनाकोमनाएं भी पूर्ण होती हैं।
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