दही चावल के भोग से लेकर चमत्कारी दीया! जानें तिरुपति बालाजी मंदिर के ये अनोखे रहस्य
तिरुपति बालाजी मंदिर जो भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। आइए जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी अनोखे और रहस्यमयी तथ्य! ...और पढ़ें

तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य (AI Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत के आंध्र प्रदेश राज्य के चित्तूर में तिरुमला पर्वत पर बसा तिरुपति बालाजी मंदिर, भगवान वेंकटेश्वर स्वामी को समर्पित दुनिया के सबसे अमीर और प्रमुख हिंदू तीर्थस्थलों में शामिल है।
देशभर में ऐसे कई मंदिर हैं, जो अपने आप में अलग तरह के रहस्यों को समेटे हुए हैं, लेकिन तिरुमला का तिरुपति बालाजी मंदिर अपनी आस्था के साथ-साथ गहरे तथ्यों के लिए भी विश्व विख्यात है। आज के इस लेख में हम तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े रोचक तथ्यों पर बात करेंगे।
मंदिरों में केशों का दान
तिरुपति बालाजी मंदिर में बालों का दान करने की भी अनोखी परंपरा है। माना जाता है कि, भगवान विष्णु ने धन और समृद्धि के देवता कुबेर से उधार लिया था और वचन दिया था कि जब कलयुग का अंत होगा, तब तक पूरा उधार चुका दिया जाएगा।
उसी ऋण को चुकाने के लिए यहां आने वाले भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर बालों का दान करते हैं। तिरुपति मंदिर में भक्तों द्वारा बाल का दान ऋण की किस्त का प्रतीक है।

छप्पन भोग नहीं चावल-दही प्रिय
दक्षिण भारत का तिरुपति बालाजी मंदिर जहां भगवान विष्णु की पूजा श्रीवेंकटेश्वर स्वामी के रूप में की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इस स्थान को कलयुग में श्रीविष्णु का निज निवास भी माना जाता है।
मंदिर में आने वाले भक्तों की माने तो यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। बात जब वेंकटेश्वर स्वामी को भोग लगाने की आती है, तब प्रसाद के रूप में लड्डू या छप्पन तरह के पकवान नहीं, बल्कि दही-चावल का भोग लगाया जाता है।
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मंदिर में रखी प्रतिमा से जुड़े रहस्य
तिरुपति बालाजी मंदिर की प्रतिमा (मूर्ति) भव्य होने के साथ काफी महत्वपूर्ण है। मान्यताओं के मुताबिक, प्रतिमा के पीछे से हमेशा समुद्र की लहरों की आवाज आती है, जिन भी भक्तों ने इसे कान लगाकर सुनने की कोशिश कि, उन्हें समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देती है।
मंदिर में मौजूद भगवान वेंकटेश्वर को मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों के वस्त्र पहनाए जाते हैं, क्योंकि प्रतिमा को मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।
वेंकटेश्वर स्वामी की प्रतिमा में लगे बाल असली
तिरुपति बालाजी मंदिर में स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति में लगे बाल असली हैं, जो कभी आपस में उलझते या बिगड़ते नहीं है। बाल हमेशा काल और चमकदार दिखाई देते हैं। इसके साथ ही गर्मियों के दिनों में श्री वेंकटेश्वर स्वामी की प्रतिमा से पसीना भी आता है, जो काफी रोचक होने के साथ उनकी मौजूदगी का एहसास दिलाता है।
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मंदिर में रखा चमत्करी दीपक
तिरुपति बालाजी मंदिर में हमेशा एक दिया जलता ही रहता है, जिसमें कभी भी घी या तेल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, बावजूद इसके भी वह हमेशा जलता रहता है। ये दीया आज भी मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए रहस्य का केंद्र बना हुआ है।
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दीपक को त्रेतायुग में खुद भगवान ब्रह्मा द्वारा जलाया गया था, जो तब से बिना किसी रुकावट के लगातार जल रहा है, जिसे अनंत काल का प्रतीक माना जाता है।
मंदिर में रखी छड़ी का महत्व
तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य द्वार के दरवाजे के दाईं तरफ एक छड़ी है। इस छड़ी को लेकर लोक मान्यताएं हैं कि, इसी डंडी से बालाजी के बाल रूप में पिटाई की गई थी, जिस वजह से उनकी ठोड़ी पर चोट लग गई और तब से लेकर आज तक उनकी ठोड़ी पर हमेशा से चंदन का लेप लगाया जाता है, ताकि उनका घाव सही हो जाए।
तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े रहस्यों और चमत्कारों का मुख्य स्त्रोत स्कंद पुराण और वराह पुराण, मंदिर के प्राचीन शिलालेख और सदियों से चली आ रही स्थानीय धार्मिक मान्यताएं और परंपराओं पर आधारित हैं।
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