पांडवों ने रातोंरात क्यों बना दिया था देवभूमि का ब्रजेश्वरी मंदिर? जिसके बाद बन गया ये विशाल शक्तिपीठ
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित ब्रजेश्वरी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का बायां स्तन ...और पढ़ें

ब्रजेश्वरी मंदिर से जुड़ा रहस्य (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
ब्रजेश्वरी मंदिर हिमाचल के कांगड़ा में स्थित एक शक्तिपीठ है।
यह मंदिर माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है।
पौराणिक कथा के अनुसार, पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण किया।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश को देवभूमि कहा जाता है। यहां पर प्राचीन समय में कई ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी। इसलिए इस जगह अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। हिमाचल प्रदेश में देवी-देवताओं के कई मंदिर हैं, जो किसी रहस्य या फिर मान्यता की वजह से प्रसिद्ध हैं।
इनमें ब्रजेश्वरी मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर माता सती 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर के निर्माण की कथा पांडवों से जुड़ी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित ब्रजेश्वरी मंदिर कैसे बना शक्तिपीठ? अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते इस मंदिर से जुड़ी कथा के बारे में।
कैसे बना श्री ब्रजेश्वरी माता मंदिर
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जहां पर माता सती का बायां स्तन गिरा था, जिससे यह एक शक्तिपीठ बन गया। इस शक्तिपीठ को श्री ब्रजेश्वरी माता मंदिर के नाम से जाना जाता है।
कैसे हुआ मंदिर का निर्माण?
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार सपने में मां दुर्गा को पांडवों को दर्शन दिए। उन्होंने सपने में कहा कि वे नगरकोट गांव में विराजमान हैं और सुरक्षित स्थान बनाने का आग्रह किया। इसके बाद इसी रात को उस स्थान पर पांडवों ने श्री ब्रजेश्वरी माता मंदिर का निर्माण किया।
श्री ब्रजेश्वरी माता मंदिर
ब्रजेश्वरी देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है। इस मंदिर को कांगड़ा देवी या नगरकोट धाम के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता सती के पिता प्रजापति दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था। इस यज्ञ सभी देवी-देवताओं को बुलाया था, लेकिन उन्होंने अपनी पुत्री को निमंत्रण नहीं दिया। माता सती यज्ञ में जाना चाहतीं थीं।
इसके लिए उन्होंने यज्ञ में जाने लिए महादेव से कहा, लेकिन माता सती को शिव जी ने यज्ञ से जाने इंकार कर दिया। इसके बाद माता सती यज्ञ में जाने लिए जिद करने लगीं। तब भगवन शिव ने माता सती को यज्ञ के लिए कहा। जब माता सती पिता के विशाल यज्ञ में पहुंचीं, तो उन्होंने पिता से यज्ञ में निमंत्रण न देने की वजह पूछी। तब प्रजापति दक्ष भगवान शिव के कटु शब्द बोलने लगे, जिससे माता सती को क्रोध आया और भगवान शिव के अपमान को सहन नहीं कर पाईं, जिसकी वजह से उन्होंने यज्ञ की अग्नि में कूदकर प्राण त्याग दिए।
इसके बाद जब इस बात का पता भगवान शिव को चला तो वे क्रोधित हुए और माता सती के मृत शरीर को लेकर तांडव करने लगे। भगवान विष्णु ने ब्रह्मांड को महादेव के क्रोध से बचाने के लिए माता सती के शरीर को 51 हिस्सों में काट दिया।
जहां-जहां पर माता सती के अंग और आभूषण गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जहां पर माता सती का बायां स्तन गिरा था, उसके बाद उस जगह पर श्री ब्रजेश्वरी माता मंदिर का निर्माण हुआ।
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source- Shri Brajeshwari Mata Temple
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