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सावन विशेष: शिव पूजा में भूलकर भी न करें 10 गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल!

Updated: Thu, 13 Aug 2026 07:30 AM (IST)

सावन हो या सामान्य दिन भगवान शिव की पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। ...और पढ़ें

भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी इन 10 चीजों का इस्तेमाल नहीं करें

भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी इन 10 चीजों का इस्तेमाल नहीं करें

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव अत्यंत पूजनीय देवताओं में शामिल हैं, जिनकी पूजा करने का विधान शास्त्रों में भी दर्ज है। भगवान शिव से जुड़ा पवित्र महीना श्रावण मास हो या महाशिवरात्रि की शुभ तिथि इन खास मौकों पर भक्तों द्वारा सच्ची श्रद्धा से पूजा-पाठ किया जाता है।

भगवान भोलेनाथ के बारे में कहा जाता है कि, अपने नाम की ही तरह उनका स्वभाव भी काफी भोला-भाला है। इसलिए उन्हें प्रसन्न करना काफी आसान है। दिखावटी या खर्चीले अनुष्ठान के विपरीत भगवान शिव सिर्फ एक लोटा जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। हालांकि शिव पूजन के दौरान कुछ खास बातों का भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं छोटी लेकिन वो प्रभावी गलतियां जिन्हें शास्त्र अनुसार, शिव पूजन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

10 mistakes to avoid during lord shiva worship what not to offer on shivling

भगवान शिव की पूजा में ये 10 गलतियां भूलकर भी न करें?

तुलसी या तुलसी दल का प्रयोग
हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पौधे में शामिल किया जाता है। भगवान विष्णु की पूजा में प्रमुखता से इसके पत्तों का इसका इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन भगवान शिव को तुलसी चढ़ाना वर्जित माना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी तुलसी या उसके पत्तों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

हल्दी और कुमकुम के प्रयोग से बचें
भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी हल्दी या कुमकुम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि भगवान शिव को वैरागी और संहारक का देवता माना जाता है। जबकि कुमकुम या हल्दी सुहाग, गृहस्थ प्रसाधन, सौंदर्य और सौभाग्य की वस्तुएं हैं।

केतकी और केवड़े के फूल
भगवान शिव की पूजा में फूलों का इस्तेमाल करते समय खासतौर पर सावधानी बरतनी की सलाह दी जाती है। इसलिए उन्हें भूलकर भी केतकी या केवड़े के सुंगधित फूलों को अर्पित नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि, इसके पीछे भगवान शिव से जुड़ा एक श्राप है जिस कारण केतकी के फूलों को शिवलिंग पर अर्पित नहीं किया जाता है।

नारियल का पानी
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान शिव को साबुत नारियल तो चढ़ाया जा सकता है, लेकिन नारियल का पानी चढ़ाना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों की माने तो, शिवलिंग पर चढ़ाई गई वस्तुएं निवेद्य या निर्माल्य बन जाती है, जिन्हें ग्रहण करना मना है। नारियल पानी का इस्तेमाल अभिषेक करने के बाद ग्रहण करने लायक नहीं रहता, इसलिए नारियल पानी के अभिषेक से बचा जाता है।

शंख का पानी
हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं का अभिषेक शंख में पानी भरकर किया जा सकता है, लेकिन शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि, पू्र्वकाल में भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के दैत्य का वध किया था। जिस कारण शंख को उसी दैत्य के अंश का प्रतीक माना जाता है।

टूटे हुए अक्षत
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ में अक्षत (चावल) का विशेष महत्व होता है। लेकिन शिवलिंग पर टूटे हुए या खंडित अक्षय अर्पित करना अशुभ माना जाता है। टूटे हुए चावल अर्पित करने से भगवान शिव का आशीर्वाद नहीं प्राप्त होता है।

काला तिल
शिव पूजा में कभी भी शिवलिंग का जलाभिषेक या दूध अर्पित करते समय कभी भी काला तिल नहीं प्रयोग करना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, काले तिल का संबंध भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है, इसलिए इसे शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए।

लौह के पात्र से जल
भगवान शिव की पूजा के दौरान उन्हें सिर्फ कांसे या तांबे के पात्र से ही जल अर्पित करना चाहिए। लौह पात्र से जल अर्पित करना अशुभ माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि महादेव ने त्रिपुर जो सोना, चांदी और लोहा से बने था, उसका संहार किया था और त्रिपुरारि कहलाये।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।