संध्या आरती के समय भूलकर भी न बजाएं शंख और घंटी, जरूर रखें इन बातों का ध्यान
घर में सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी की कृपा के लिए संध्या आरती बहुत जरूरी है। जानिए शाम की पूजा ...और पढ़ें

संध्या पूजा का महत्व (AI-Generated Image)
HighLights
शाम की पूजा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
शाम 6-7 बजे पूजा का सर्वोत्तम समय है
दीपक जलाकर आरती और मंत्र जप से शांति मिलती है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सुबह की पूजा जितनी अहम होती है, शाम की आरती यानी 'संध्या वंदन' का भी उतना ही महत्व बताया गया है। धर्म शास्त्रों की मानें तो शाम के वक्त पूजा करने से हम ईश्वर और प्रकृति के बेहद करीब आ जाते हैं और इससे हमारी आत्मा भी शुद्ध हो जाती है। इस आर्टिकल में जानेंगे संध्या पूजन का महत्व और पूजा की आसान विधि।
संध्या आरती का महत्व क्या है?
जब सूरज ढल रहा हो और रात की शुरुआत हो रही हो, उस समय को संध्या काल यानी प्रदोष काल का समय कहा जाता है। यह समय भगवान का ध्यान करने के लिए सबसे बेहतरीन माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस समय नकारात्मक शक्तियां (Negative Energy) सबसे ज्यादा प्रभावशाली होती हैं, इसलिए उनके हावी होने का खतरा भी सबसे अधिक मंडराता है।
ऐसे में जब आप घर के मंदिर में दीपक जलाकर आरती करते हैं, तो वह रोशनी घर से हर तरह की नेगेटिव एनर्जी को बाहर कर देती है। इससे घर का माहौल शांत होता है और वहां मां लक्ष्मी का वास होता है।
प्रदोष काल की पूजा का सही समय
आमतौर पर शाम 4 बजे से 6 बजे के बीच का समय संध्या काल माना जाता है। लेकिन, गर्मियों के दिनों में सूरज देर से ढलता है, इसलिए शाम 7:30 बजे तक भी आरती करना शुभ होता है। अगर सबसे सटीक समय की बात करें, तो शाम 6:00 बजे से 7:30 बजे के बीच पूजा कर लेना सबसे अच्छा रहता है।
घर पर आरती करने की सबसे आसान विधि
- शाम की पूजा से पहले समय हाथ-मुंह धोकर फ्रेश हो जाएं। मंदिर के सामने एक साफ आसन बिछाकर बैठें और सबसे पहले भगवान को प्रणाम करके पूरे दिन के लिए उन्हें धन्यवाद दें।
- इसके बाद दीपक और धूप जलाएं।
- आप 'ॐ जय जगदीश हरे' या अपने इष्ट देवता की आरती कर सकते हैं।
- आरती के बाद भगवान को तुलसी का पत्ता डालकर भोग (प्रसाद) लगाएं।
- इसके बाद शांति से बैठकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः' या 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
- अंत में मंदिर का पर्दा लगा दें और वहां एक हल्का सा बल्ब या नाइट लैंप जलता छोड़ दें, क्योंकि मंदिर में कभी भी अंधेरा नहीं करना चाहिए।
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