महादेव के प्रिय मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का अर्थ क्या है, इसका जाप 108 बार करना शुभ क्यों माना जाता है?
हिंदू धर्म में 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र के नियमित जाप से कई लाभ होते हैं, यह ईश्वर से आशीर्वाद और मार्गदर्शन पाने का आसान तरीका है। इसका जाप 108 बार करने क ...और पढ़ें

ॐ नमः शिवाय मंत्र: अर्थ, महत्व और 108 बार जाप का रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी मंत्र के जाप का फल अलग होता है और मंत्रों के जाप से मानसिक और शारीरिक शुद्धि होती है। ऐसे ही मंत्रों में से एक है भगवान शिव का सबसे प्रिय और शक्तिशाली मंत्र 'ॐ नमः शिवाय', जिसके नियमित जाप से कई लाभ होते हैं।
यह मंत्र ईश्वर से आशीर्वाद और मार्गदर्शन पाने का आसान तरीका माना जाता है। इस मंत्र के पूर्ण प्रभाव के लिए इसका सही उच्चारण भी जरूरी माना जाता है और नियम से इसका जाप करना शुभ होता है। ऐसी मान्यता है कि इसका जाप नियमित 108 बार ही करना चाहिए जिससे इसका पूर्ण प्रभाव जीवन में हो सके।
यही नहीं इस मंत्र के अर्थ में भी बहुत से ऐसे प्रेरणदायी शब्द छिपे हैं जो जीवन के लिए समृद्धि का मार्ग खोलते हैं। आइए यहां जानें इस मंत्र के जाप के फायदे, इसका अर्थ और 108 बार जाप करने के पीछे का रहस्य क्या है?
ॐ नमः शिवाय का अर्थ क्या है?
ॐ नमः शिवाय मंत्र का अर्थ-शिव को नमस्कार करने से है। किसी साधना की सर्व सिद्धि के लिए जिस पहले शब्द की आवश्यकता होती है वो है ॐ और इसके जाप से बुद्धि की शुद्धि होती है। इससे बुद्धि उदार बनती है इससे इच्छाओं की पूर्ति ही नहीं बल्कि इसका अभाव भी हो जाता है।
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ॐ शब्द तीन ध्वनियों से बना है जिसमें अ मतलब आकार जो ब्रह्मा का वाचक है, उ मतलब ऊंकार जो विष्णु का वाचक है, म मतलब मकार जो शिव का वाचक है। इसका तात्पर्य यह हुआ कि यह एक शब्द तीनों देवों की प्रार्थना को दिखाता है। इसके बाद दो शब्द आते हैं 'नमः और शिवाय' जिसका अर्थ है- 'शिव को नमस्कार' यह शिव पंचाक्षर मंत्र के नाम से भी जाता है और ॐ नमः शिवाय का पूर्ण अर्थ है 'मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूं' ।
'ॐ नमः शिवाय' का महत्व
यह मंत्र जाप करने वाले को ईश्वर से जोड़ता है और एकता व सद्भाव की भावना पैदा करता है। ऐसा माना जाता है कि इसमें नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करने, शांति और समृद्धि लाने और आध्यात्मिक ज्ञान देने की शक्ति होती है। यह मंत्र पांच अक्षरों से बना है और हर अक्षर का गहरा आध्यात्मिक महत्व है।
'ॐ नमः शिवाय' का जाप भगवान शिव का आशीर्वाद और मार्गदर्शन पाने का एक शक्तिशाली तरीका माना जाता है, जिससे भक्त को जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
'ॐ नमः शिवाय' का जाप 108 बार क्यों करना चाहिए?
इस मंत्र का जाप हमेशा 108 बार ही करना चाहिए क्योंकि शास्त्रों के अनुसार पूरे ब्रह्मांड में 27 नक्षत्र हैं और हर नक्षत्र की चार दिशाएं हैं। इसका मतलब यह है कि जब आप जब 27 को चार से गुणा करेंगे, तो संख्या 108 संख्या आएगी।
ये संख्या पूरे ब्रह्मांड को रिप्रेजेंट करती है और जब हम किसी मंत्र का जाप 108 बार करते हैं तो हमारी अंतर यात्रा बाहरी ब्रह्मांड से एक हो जाती है।
ऐसा कहा जाता है कि हमारे शरीर में 108 नाड़ियां एक साथ हृदय चक्र पर मिलती हैं। यानी हमारा केंद्र, हमारी चेतना, हमारा प्रेम सब 108 की संख्या से जुड़ा है। इसी वजह से जब हम ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप 108 बार करते हैं, तो यह पूर्ण फल देता है।
अगर आप भी ॐ नमः शिवाय का जाप नियम से और सही संख्या में करेंगी तो आपको इसके पूर्ण लाभ मिल सकते हैं।
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