सावन में कितनी बार 'ओम नम: शिवाय' मंत्र का जाप करने से खुलेगा भाग्य?
सावन में 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र जाप 11, 108, 1008 और 11,000 बार करने का धार्मिक महत्व और आध्यात्मिक लाभ पढ़ें। ...और पढ़ें

'ॐ नमः शिवाय' मंत्र जाप की सही संख्या । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र "ॐ नमः शिवाय" बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस मंत्र का जाप हर दिन करना चाहिए और यदि आप ऐसा नहीं कर पा रहे हैं, तो सावन के महीने में तो बिना नागा आपको इस मंत्र का जाप करना चाहिए। साधक को अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र को एक शुद्ध संख्या के अनुसार जपना चाहिए। शिव पुराण के अनुसार सनातन परंपरा में मंत्र जाप के लिए कुछ विशेष संख्या बताई गई हैं, उन संख्याओं के अनुसार अलग-अलग भी बताए गए हैं। यदि आप नियमित इस मंत्र का जाप विशेष संख्या में करते हैं, तो उसके अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं। चलिए हम आपको यह बताते हैं कि कितनी बार 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करने से क्या फल प्राप्त होता है।
क्या है जप की संख्या का विशेष महत्व ?
अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि 11, 108, 1008 या 11,000 बार मंत्र जप करने का क्या महत्व होता है? पुराण में इन संख्याओं के धार्मिक महत्व को व्यक्ति के शरीर की सुषुम्ना नाड़ी से जोड़ा गया है। इस नाड़ी के बीच में ही सात चक्र होते हैं, जिन्हें जाग्रत करने के लिए "ॐ नमः शिवाय" का जाप किया जाता है। हिंदू धर्म में इन संख्याओं को पवित्र माना गया है। अंकशास्त्र में अंक दो और नौ का महत्व बताया गया है। अंकशास्त्र में अंक 2 और 9 का महत्व बताया गया है। जहां संख्या 2 चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करती है और मन को मजबूत बनाती है, वहीं संख्या 9 का संबंध मंगल से होता है, जो ऊर्जा और साहस का प्रतीक होता है। ऐसे में जब हम 11, 108, 1008 या 11,000 बार मंत्र जप करते हैं तो हमारा मन मंत्रों में लग जाता है और उसकी ऊर्जा हमारे पूरे शरीर में संचारित हो रही होती है।
11 बार जप
यदि आप अभी मंत्र जप की शुरुआत कर रहे हैं, तो प्रतिदिन 11 बार "ॐ नमः शिवाय" का उच्चारण करना एक सरल और अच्छा अभ्यास हो सकता है। इससे मन को कुछ समय के लिए शांति मिलती है।
108 बार जप
हिंदू परंपरा में 108 संख्या को अत्यंत शुभ माना जाता है। रुद्राक्ष माला में भी सामान्यतः 108 मनके होते हैं। सोमवार, प्रदोष या दैनिक पूजा के समय 108 बार इस मंत्र का जाप करने से आपके अंदर एकाग्रता बढ़ती है।
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1008 बार जप
विशेष अवसरों जैसे सावन के सोमवार, प्रदोष या मासिक शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं को 1008 बार इस मंत्र का जप करना चाहिए। इससे साधक के अंदर धैर्य, अनुशासन और भगवान के प्रति समर्पण का भाव जागता है।
11,000 बार जप
सावन में किए गए किसी विशेष अनुष्ठान में कुछ साधक 11,000 मंत्र जप का संकल्प भी लेते हैं। इतनी बार मंत्र जाप कर आप अपनी किसी विशेष मनोकामना को भगवान शिव जी के माध्यम से पूर्ण करा सकते हैं।
अत: "ॐ नमः शिवाय" केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि मन की शांति और भक्ति का मार्ग है। चाहे आप 11 बार जप करें या 108 बार, सबसे अधिक महत्वपूर्ण कि आप जब जाप करें तो पूरी श्रद्धा के साथ करें।
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