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    क्या आप भी करते हैं 'ॐ नमः शिवाय' का जप? नोट कर लें महादेव को प्रसन्न करने का 'सीक्रेट' तरीका

    Updated: Fri, 17 Apr 2026 02:30 PM (IST)

    महादेव को 'आशुतोष' कहा जाता है क्योंकि वे बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। जानें 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र के जप की सही विधि और संख्या जो आपके जीवन से हर संकट क ...और पढ़ें

    जीवन पर क्या प्रभाव डालता है 'ॐ नमः शिवाय' का जप?

    जीवन पर क्या प्रभाव डालता है 'ॐ नमः शिवाय' का जप?

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए किसी तामझाम की जरूरत नहीं है, वे तो केवल सच्ची श्रद्धा और भाव के भूखे हैं। शिव पुराण के अनुसार, 'ॐ नमः शिवाय' केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की संपूर्ण सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र है। इसे पंचाक्षरी मंत्र भी कहा जाता है, जो हमारे शरीर और ब्रह्मांड के पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) को संतुलित करता है।

    आइए जानते हैं कि इस मंत्र का जाप आपको कैसे और कितनी बार करना चाहिए:

    जप की संख्या का क्या है गणित?

    शास्त्रों के अनुसार, आपकी जरूरत और उद्देश्य के हिसाब से जप की संख्या तय होती है:

    मानसिक शांति और डेली रूटीन के लिए: रोजाना कम से कम 108 बार (एक माला) जप करें। इससे मानसिक तनाव (Mental Stress) कम होता है और घर में पॉजिटिविटी आती है।

    किसी खास मनोकामना के लिए: अगर आप अपनी कोई विशेष इच्छा पूरी करना चाहते हैं, तो सवा लाख (1,25,000) बार मंत्र जाप का संकल्प लें। इसे आप 21, 41 या 51 दिनों में अपनी सुविधा अनुसार पूरा कर सकते हैं।

    संकट और डर से मुक्ति के लिए: अगर मन अशांत है या किसी अनहोनी का डर सता रहा है, तो 1008 बार जाप करने से तुरंत राहत और अद्भुत साहस मिलता है।

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    (Image Source: AI-Generated)

    जप की सही विधि: इन 4 बातों का रखें ध्यान

    मंत्र का पूरा फल तभी मिलता है जब इसे सही तरीके से किया जाए:

    • सबसे अच्छा समय ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) है। अगर सुबह संभव न हो, तो शाम को प्रदोष काल में जप करें।
    • कभी भी सीधे जमीन पर बैठकर जप न करें। कुशा या ऊनी आसन का प्रयोग करें।
    • शिव जी के अंश रुद्राक्ष की माला से किया गया जप सबसे प्रभावशाली माना जाता है।
    • जप करते समय अपना चेहरा पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर रखें।

    इस महामंत्र के 3 सबसे बड़े लाभ

    अगर आपकी कुंडली में शनि (Shani) भारी है या चंद्रमा (Moon) कमजोर है, तो यह मंत्र आपके लिए रामबाण है। यह ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है।

    यह मंत्र शरीर के भीतर की हीलिंग पावर को बढ़ाता है और मन से अकाल मृत्यु जैसे डर को खत्म कर देता है।

    इसके निरंतर जाप से एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे ऑफिस और बिजनेस की बाधाएं दूर होने लगती हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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